मऊ: उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से शिक्षा जगत को झकझोर देने वाली एक पुरानी घटना में इंसाफ की खबर आई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने वर्ष 2015 के इंटरमीडिएट सामूहिक नकल मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए आठ शिक्षकों को दोषी करार दिया है। अदालत ने इन सभी दोषियों को चार-चार महीने के कारावास और दो-दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है।
यह मामला कोपागंज थाना क्षेत्र के कृषक इंटर कॉलेज, संतपुर गोड़सरा का है। वर्ष 2015 में यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट अंग्रेजी (प्रथम प्रश्न पत्र) की परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल की शिकायत मिली थी। जाँच में पाया गया कि केंद्र पर शिक्षकों द्वारा छात्रों को बाकायदा बोल-बोलकर उत्तर लिखवाए जा रहे थे।
- नामजद आरोपी: शुरुआत में इस मामले में कुल 22 लोगों को आरोपी बनाया गया था।
- कानूनी कार्रवाई: सुनवाई के दौरान 8 शिक्षकों को उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम की धारा 10 के तहत दोषी पाया गया।
- शेष आरोपी: अन्य आरोपियों की पत्रावली (File) को कोर्ट ने मुख्य केस से अलग कर दिया है, जिसकी प्रक्रिया जारी रहेगी।
अदालत की सख्त टिप्पणी
फैसला सुनाते समय CJM डॉ. कृष्ण प्रताप सिंह ने शिक्षकों की जिम्मेदारी और परीक्षा की शुचिता पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा: "परीक्षा की स्वच्छता और पारदर्शिता बनाए रखने में शिक्षक की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। दोषियों को इस बात का अहसास होना चाहिए कि उन्होंने अपराध किया है, ताकि समाज और पीड़ित पक्ष को यह विश्वास हो सके कि न्याय हुआ है।"

