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संपत्ति का ब्योरा छुपाने वाले 2000 से अधिक शिक्षा कर्मियों पर गिरेगी गाज, निदेशालय का अंतिम अल्टीमेटम

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश शिक्षा विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए शासन ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। चल-अचल संपत्ति का विवरण 'मानव संपदा पोर्टल' पर दर्ज न करने वाले 2,014 अधिकारियों और कर्मचारियों को शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने अंतिम चेतावनी जारी की है।

​क्या है पूरा मामला?

​शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रताप सिंह बघेल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, विभाग के कुल 6,625 कार्मिकों में से अब तक केवल 4,611 ने ही अपनी संपत्तियों का ब्योरा सार्वजनिक किया है। शेष 2,014 कार्मिकों द्वारा विवरण न दिया जाना विभाग के अनुशासन और शासन की पारदर्शिता नीति का उल्लंघन माना जा रहा है।

​📅 31 जनवरी तक का समय, वरना 1 फरवरी को पेशी

​निदेशालय ने इस लापरवाही को अत्यंत गंभीरता से लिया है। आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • डेडलाइन: सभी शेष कार्मिकों को 31 जनवरी 2026 तक हर हाल में पोर्टल पर अपना विवरण फीड करना होगा।
  • व्यक्तिगत उपस्थिति: जो कर्मचारी इस समय सीमा का पालन नहीं करेंगे, उन्हें 1 फरवरी 2026 को सुबह 10:00 बजे बेसिक शिक्षा निदेशालय, लखनऊ (शिविर कार्यालय) में उपस्थित होना होगा।
  • जवाबदेही: उपस्थित होकर कार्मिकों को यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने अब तक शासन के आदेशों की अवहेलना की है।

​सख्त कार्यवाही के संकेत

​विभागीय सूत्रों के अनुसार, संपत्ति का विवरण न देने वाले कार्मिकों के वेतन रोकने या उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने पर भी विचार किया जा सकता है। यह कदम 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत उठाया गया है ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम कसी जा सके।

इस पत्र से स्पष्ट है कि चल –अचल संपत्ति का विवरण मात्र राज्य कर्मचारियों के लिए ही भरा जाना अनिवार्य है भले ही बेसिक शिक्षा लिखा हो लेकिन वह बेसिक शिक्षा के अधीन कार्यरत राज्य कर्मचारियों के लिए है ना कि परिषदीय शिक्षकों के लिए✍🏻

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