प्रयागराज/नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 12,460 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में एक नया मोड़ आया है। न्यायालय ने इस मामले में राज्य सरकार को सख्त निर्देश देते हुए भर्ती प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और योग्य अभ्यर्थियों की जिलावार सूची पेश करने का आदेश दिया है। इस फैसले से लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों में एक नई उम्मीद जगी है।
📋 न्यायालय के आदेश के मुख्य बिंदु
न्यायालय ने इस जटिल मामले को सुलझाने के लिए निम्नलिखित निर्देश जारी किए हैं:
- जिलावार सूची का निर्माण: राज्य सरकार को उन सभी अपीलकर्ताओं और हस्तक्षेपकर्ताओं (Intervenors) की एक विस्तृत सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है, जिन्होंने अब तक न्यायालय के समक्ष आवेदन किया है। यह सूची मामले की योग्यता (Merit) और भर्ती नियमों के अनुसार जिलावार तैयार की जाएगी।
- कट-ऑफ डेट का पालन: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह सूची 15 दिसंबर 2016 (विज्ञापन की मूल तिथि) के समय की योग्यता और नियमों के आधार पर ही बनाई जाएगी।
- जॉइनिंग पर होगा विचार: सरकार द्वारा यह सूची अगली सुनवाई की तिथि तक या उससे पहले न्यायालय में प्रस्तुत की जानी है। सूची पेश होने के बाद, कोर्ट अभ्यर्थियों के कार्यभार ग्रहण करने (Joining) के संबंध में उचित आदेश पारित करेगा।
📅 अगली सुनवाई और समय सीमा
न्यायालय ने इस मामले की अगली कार्यवाही के लिए 18 मार्च 2026 की तिथि निर्धारित की है। तब तक राज्य सरकार को पूरी सूची तैयार कर न्यायालय के समक्ष विचार के लिए प्रस्तुत करनी होगी।
🔍 क्या है विवाद?
12,460 शिक्षक भर्ती पिछले कई वर्षों से कानूनी दांव-पेचों में फंसी हुई है। मुख्य विवाद शून्य जनपद (Zero Vacancy District) के अभ्यर्थियों की काउंसलिंग और नियुक्ति को लेकर था। अब न्यायालय द्वारा योग्यता के आधार पर नई सूची मांगे जाने से इस विवाद के स्थायी समाधान की संभावना बढ़ गई है।
🎯 अभ्यर्थियों के लिए क्या बदलेगा?
इस आदेश के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। यदि सरकार समय पर पारदर्शी तरीके से मेरिट लिस्ट प्रस्तुत करती है, तो मार्च के अंत तक चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो सकता है।









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