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परिषदीय विद्यालयों हेतु कक्षा 1 से 8 तक अंकों के वितरण की संपूर्ण जानकारी

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से परीक्षाफल निर्माण हेतु अंकों के वितरण में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इस नई प्रणाली में कक्षा-वार मूल्यांकन विधि को अधिक पारदर्शी, सरल और शिक्षार्थी-केन्द्रित बनाया गया है। आइए, कक्षा 1 से 8 तक परीक्षाओं और अंकों के नवीन वितरण को विस्तार से समझें।


कक्षा 1: 100% मौखिक मूल्यांकन (कुल पूर्णांक – 300)

कक्षा 1 में विद्यार्थियों के मानसिक व भाषा विकास को ध्यान में रखते हुए पूरा मूल्यांकन मौखिक रखा गया है।

अंक विभाजन

  • प्रथम सत्र परीक्षा: 10
  • अर्धवार्षिक परीक्षा: 30
  • द्वितीय सत्र परीक्षा: 10
  • वार्षिक परीक्षा: 50

प्रत्येक विषय में मौखिक मूल्यांकन ही होगा।


कक्षा 2: लिखित एवं मौखिक का संतुलन (कुल पूर्णांक – 300)

कक्षा 2 में 50% लिखित और 50% मौखिक मूल्यांकन का प्रावधान किया गया है।

अंक विभाजन

  • प्रथम सत्र परीक्षा: 10 (5 लिखित + 5 मौखिक)
  • अर्धवार्षिक परीक्षा: 30 (15 लिखित + 15 मौखिक)
  • द्वितीय सत्र परीक्षा: 10 (5 लिखित + 5 मौखिक)
  • वार्षिक परीक्षा: 50 (25 लिखित + 25 मौखिक)

कक्षा 3: संतुलित मूल्यांकन प्रणाली (कुल पूर्णांक – 700)

कक्षा 3 में भी 50% लिखित और 50% मौखिक मूल्यांकन प्रणाली लागू है।

अंक विभाजन

  • प्रथम सत्र परीक्षा: 10 (5+5)
  • अर्धवार्षिक परीक्षा: 30 (15+15)
  • द्वितीय सत्र परीक्षा: 10 (5+5)
  • वार्षिक परीक्षा: 50 (25+25)

कक्षा 4 व 5: लिखित मूल्यांकन (कुल पूर्णांक – 700)

इन कक्षाओं में लिखित मूल्यांकन का भार 70% और मौखिक का 30% निर्धारित किया गया है।

अंक विभाजन

  • प्रथम सत्र परीक्षा: 10 (7 लिखित + 3 मौखिक)
  • अर्धवार्षिक परीक्षा: 30 (21 लिखित + 09 मौखिक)
  • द्वितीय सत्र परीक्षा: 10 (7 लिखित + 3 मौखिक)
  • वार्षिक परीक्षा: 50 (35 लिखित + 15 मौखिक)

कक्षा 6, 7 व 8: 100% लिखित मूल्यांकन (कुल पूर्णांक – 1000)

उच्च प्राथमिक कक्षाओं में विद्यार्थियों की लेखन क्षमता और अवधारणात्मक समझ को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सम्पूर्ण मूल्यांकन लिखित आधारित है।

अंक विभाजन

  • प्रथम सत्र परीक्षा: 10
  • अर्धवार्षिक परीक्षा: 30
  • द्वितीय सत्र परीक्षा: 10
  • वार्षिक परीक्षा: 50

नई मूल्यांकन प्रणाली का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनकी सीखने की गति के अनुसार मूल्यांकित करना, उन्हें प्रोत्साहित करना और कक्षा-वार कौशल विकसित करना है। नीचे की कक्षाओं में मौखिक व गतिविधि आधारित मूल्यांकन और उच्च कक्षाओं में लिखित मूल्यांकन विद्यार्थियों की समग्र शैक्षिक प्रगति को सुनिश्चित करता है।

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