इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के रवैये पर गहरी नाराजगी जताते हुए उन्हें अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह निर्देश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने शाहजहांपुर निवासी शिक्षिका कल्पना शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
याचिका में कहा गया था कि शिक्षिका कैंसर से पीड़ित हैं और उन्होंने सहानुभूतिपूर्वक स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था, ताकि इलाज और देखभाल बेहतर ढंग से हो सके। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मामले पर मानवीय और संवेदनशील दृष्टि से विचार किया जाए। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव ने तकनीकी आधारों पर उनका आवेदन खारिज कर दिया, जिस पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।
सहानुभूति के निर्देश के बाद भी तकनीकी आधार पर अस्वीकृति
अदालत ने कहा कि यह “आश्चर्य और हैरानी” की बात है कि स्पष्ट निर्देशों के बावजूद याची के प्रकरण पर संवेदनशीलता से विचार नहीं किया गया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि सचिव का यह आचरण प्रथमदृष्टया दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि उन्होंने मामले के मूल पहलुओं की बजाय तकनीकी कारणों का सहारा लेकर याची के अनुरोध को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में अधिकारियों का दायित्व है कि वे मानवीय पक्ष को प्राथमिकता दें और गंभीर बीमारी से जूझ रहे कर्मचारी के हित में उचित कदम उठाएं।
अगली सुनवाई में उपस्थिति अनिवार्य
अदालत ने सचिव को निर्देश दिया है कि वे अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहें। कोर्ट अब इस मामले की आगे गहन समीक्षा करेगा।
इस फैसले के बाद उम्मीद है कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित कर्मचारियों के मामलों में प्रशासन अधिक संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण अपनाएगा।


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