बरेली। प्रदेशभर में चर्चा का विषय बने शिक्षक समायोजन मामले में अब बड़ा समाधान सामने आया है। बेसिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक द्वारा जारी आदेश से समायोजित शिक्षक और एकल विद्यालय—दोनों पक्षों को राहत मिली है। चार महीने से नए विद्यालयों में कार्यरत समायोजित शिक्षक जहाँ भयमुक्त हुए हैं, वहीं एकल हो चुके विद्यालयों को भी सरप्लस विद्यालयों से शिक्षक भेजने का निर्देश देकर स्थिरता प्रदान की गई है।
📌 जुलाई में हुए समायोजन से पैदा हुआ था विवाद
जुलाई 2025 में प्रदेश के हजारों शिक्षकों का समायोजन किया गया था।
- बेसिक शिक्षा सचिव ने सूची जारी की
- शिक्षकों को पुराने विद्यालय से कार्यमुक्त करके
- नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कराया गया
लेकिन जैसे ही कुछ विद्यालय शिक्षकों के कार्यमुक्त होने से एकल दिखाई दिए, विवाद शुरू हो गया।
📌 “विद्यालय एकल न करें”–कहीं वापसी आदेश, कहीं विरोध
कुछ जिलों में बीएसए ने समायोजित शिक्षकों की वापसी के आदेश जारी कर दिए, जबकि विभागीय स्तर पर ऐसा कोई आदेश नहीं था।
इससे—
- नए विद्यालय में 4 माह से पढ़ा रहे शिक्षक असमंजस में पड़ गए
- एकल विद्यालयों के अभिभावक व शिक्षक भी असंतुष्ट हुए
दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट में रिट दायर कर न्याय की मांग की।
📌 महानिदेशक का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग निर्देश
समस्या बढ़ती देख महानिदेशक ने VC के माध्यम से सभी बीएसए को स्पष्ट आदेश दिया—
✔ “समायोजित शिक्षक हर हाल में अपने नए विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करें।”
✔ “एकल विद्यालयों को समायोजन-3 प्रक्रिया के तहत भरा जाएगा।”
इसके बावजूद कुछ जिलों ने मनमाना आदेश जारी कर दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
📌 हाईकोर्ट की शरण में गए शिक्षक
दो तरह की याचिकाएँ दायर हुईं—
1️⃣ नए विद्यालय में पढ़ा रहे शिक्षकों की याचिका:
- चार महीने से पढ़ा रहे हैं
- वापसी से छात्रों की पढ़ाई बाधित होगी
- मानसिक उत्पीड़न हो रहा है
2️⃣ एकल विद्यालय हुए शिक्षकों की याचिका:
- हमारे विद्यालय को एकल करके समायोजन गलत
- मूल शिक्षक को वापस भेजा जाए
दोनों पक्षों की दलीलें सही थीं, लेकिन समाधान जटिल था।
📌 “एक तीर से दो निशाने”—महानिदेशक का 16 नवंबर का बड़ा आदेश
16 नवंबर को महानिदेशक ने निर्णायक आदेश जारी कर दिया—
🟦 इसमें स्पष्ट किया गया:
- पदोन्नति, स्थानांतरण (समायोजन), मृत्यु आदि कारणों से
एकल या शिक्षकविहीन हुए विद्यालयों में - समायोजन के फलस्वरूप सरप्लस विद्यालयों से शिक्षक भेजे जाएँगे
- यह कार्य जिला निर्वाचन अधिकारी की अध्यक्षता में जनपदीय समिति करेगी
- किसी भी समायोजित शिक्षक पर वापसी का दबाव नहीं बनाया जाएगा
👉 कुल मिलाकर, समायोजित शिक्षक भी सुरक्षित
👉 और एकल विद्यालय भी शिक्षक विहीन नहीं रहेंगे
📌 दोनों पक्षों में खुशी की लहर
इस आदेश के बाद—
- समायोजित शिक्षक राहत महसूस कर रहे हैं
- एकल विद्यालयों को भी जल्द शिक्षक मिलेंगे
- प्रशासनिक भ्रम दूर हुआ
- फील्ड में स्थिरता आई
शिक्षकों का कहना है—
“साँप भी मर गया और लाठी भी नहीं टूटी।”
📝 निष्कर्ष
महानिदेशक के आदेश ने लंबे समय से चल रहे समायोजन विवाद का संतुलित समाधान दिया है।
अब—
- समायोजित शिक्षक अपनी सेवा जारी रख सकेंगे
- एकल विद्यालयों को नए शिक्षक भेजे जाएंगे
- और जिला स्तरीय समिति निगरानी में पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी।
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