लखनऊ। देशभर के प्राथमिक शिक्षकों में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने को लेकर गुस्सा बढ़ता जा रहा है। इसी के विरोध में विभिन्न शिक्षक संगठनों ने दिल्ली कूच का एलान किया है। अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा ने 24 नवंबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन की घोषणा की है।
मोर्चा पदाधिकारियों ने बताया कि इस प्रदर्शन में न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर के शिक्षक शामिल होंगे। उनका कहना है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर भी टीईटी अनिवार्य करना सरासर अन्याय है। शिक्षक संगठनों ने इसे “काला कानून” बताते हुए हर स्तर पर विरोध करने का ऐलान किया है।
मोर्चा के राष्ट्रीय सह संयोजक अनिल यादव ने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो शिक्षक संसद का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वर्षों की सेवा देने वाले शिक्षकों पर टीईटी लागू करना उनके अनुभव और योग्यता का अपमान है।
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सहित चार राज्य सरकारों ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। हालांकि अब तक इस पर सुनवाई नहीं हुई है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जब तक एनसीटीई अपने निर्णय को वापस नहीं लेता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। 24 नवंबर का जंतर-मंतर प्रदर्शन इस आंदोलन का निर्णायक पड़ाव साबित हो सकता है।

