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उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा में छलांग, शीर्ष राज्यों की श्रेणी में शामिल हुआ उत्तर प्रदेश, ASER की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश की बुनियादी शिक्षा में छलांग, शीर्ष राज्यों की श्रेणी में शामिल हुआ उत्तर प्रदेश, ASER की रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख

  • कक्षा तीन के बच्चों के पढ़ने का स्तर 8.3% और गणितीय दक्षता 7% सुधरी

लखनऊ। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई और गणितीय क्षमता में जबरदस्त उछाल आया है। निपुण भारत मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और सतत प्रयासों से सरकारी स्कूलों में बुनियादी शिक्षा में बड़ा बदलाव आया है। एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (असर) के अनुसार कक्षा तीन के बच्चों के पढ़ने के स्तर में 8.3 फीसदी और गणितीय दक्षता में 7 फीसदी का सुधार हुआ है। इससे यूपी, शिक्षा में गुजरात और तमिलनाडु जैसे शीर्ष राज्यों की श्रेणी में शामिल हो गया है।

प्रदेश में वर्ष 2018 में कक्षा 3 के बच्चों की पढ़ने की क्षमता का स्तर 12.3 फीसदी था। वर्ष 2024 में यह बढ़कर 27.9 फीसदी हो गया है। यानी कुल 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं गणितीय दक्षता 2018 में 11.2 फीसदी थी जो 2024 में बढ़कर 31.6 फीसदी पहुंच गई है। इस प्रकार कुल 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि पिछले छह वर्षों में हुए इन सुधारों ने प्रदेश को शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा किया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 2025 तक हर बच्चे को बुनियादी साक्षरता और गणना में दक्ष करने का लक्ष्य है। इसके लिए प्रदेश में निपुण भारत मिशन को प्रभावी तरीके से लागू किया जा रहा है। प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ने, लिखने और गणना करने में बच्चों को सक्षम बनाया गया है। 

सरकारी स्कूलों में कक्षा तीन के बच्चों के पढ़ने का स्तर बढ़ा

14-16 आयुवर्ग के 80 फीसदी से अधिक बच्चे जानते हैं स्मार्टफोन का उपयोग करना, ASER की रिपोर्ट में हुआ खुलासा 

नई दिल्ली। सरकारी स्कूलों में पढ़ाई और बुनियादी अंकगणित सीखने के स्तर में जबरदस्त सुधार हुआ है। सरकारी स्कूलों ने निजी स्कूलों को भी पछाड़ दिया है। यह बदलाव काफी हद तक सरकारी विद्यालयों में बच्चों के सीखने की क्षमता में वृद्धि के कारण हुआ है। तीसरी कक्षा के बच्चों के पढ़ने का स्तर सुधार के साथ 27.1 फीसदी तक पहुंच गया है।

साढ़े छह लाख बच्चों पर सर्वे : 

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले चौथी कक्षा के बच्चों की पढ़ाई का स्तर भी सुधरा है। सरकारी स्कूलों में चौथी कक्षा के उन बच्चों का प्रतिशत, जो दूसरी कक्षा के स्तर का पाठ पढ़ सकते हैं, 2018 में 50.5 प्रतिशत से घटकर 2022 में 42.8 प्रतिशत हो गया था। लेकिन 2024 में यह बढ़कर 48.8 फीसदी हो गया है। असर एक राष्ट्रव्यापी ग्रामीण घरेलू सर्वेक्षण है जिसमें भारत के 605 ग्रामीण जिलों के 17,997 गांवों के 6,49,491 बच्चों को शामिल किया गया।

90 फीसदी घरों में स्मार्टफोन को लेकर बेटी और बेटे में भी भेदभाव

14-16 आयु वर्ग के 90 फीसदी बच्चों ने कहा कि उनके घर में स्मार्टफोन है। 80 फीसदी प्रयोग करना जानते हैं, जिसमें 79.4 फीसदी बेटियां तो 85.5 फीसदी लड़के हैं। इसमें भी 36.2 फीसदी लड़कों और अपना स्मार्टफोन है। इसका महज 26.9 फीसदी बेटियों के पास अर्थ है कि स्मार्टफोन दिलवाने में अभिभावक बेटे और बेटी में भेदभाव करते हैं। करीब 82.2 फीसदी बच्चे स्मार्टफोन का इस्तेमाल शैक्षिक गतिविधियों के लिए करते हैं।

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