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यूपी के 25 हजार अनुदेशकों की बड़ी जीत, 2017 से बढ़ा मानदेय मिलेगा; सरकार की Review Petition खारिज

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश के जूनियर हाई स्कूलों में कार्यरत करीब 25 हजार अनुदेशकों के लिए सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत भरी खबर आई है। सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर रिव्यू (Review) पिटिशन को खारिज करते हुए अपने 4 फरवरी 2026 के ऐतिहासिक फैसले को बरकरार रखा है। इसके साथ ही अनुदेशकों को वित्तीय वर्ष 2017-18 से बढ़े हुए ₹17,000 प्रतिमाह मानदेय का लाभ मिलने का रास्ता साफ हो गया है।

यूपी अनुदेशकों को बड़ी राहत: सुप्रीम कोर्ट ने Review Petition खारिज

जस्टिस विक्रम नाथ और पी.बी. वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि 4 फरवरी 2026 के फैसले में किसी भी प्रकार की त्रुटि नहीं है, इसलिए उसकी समीक्षा का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने एक पन्ने के आदेश में राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया।

2017 से मिलेगा बढ़ा हुआ मानदेय

सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि अनुदेशकों को वित्तीय वर्ष 2017-18 से ₹17,000 प्रतिमाह के हिसाब से मानदेय दिया जाए। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया था कि 1 अप्रैल 2026 से बढ़ा हुआ मानदेय नियमित रूप से दिया जाए तथा छह माह के भीतर बकाया राशि का भुगतान भी किया जाए।

अनुबंध समाप्त होने के बाद नियुक्ति मानी जाएगी स्थायी

सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि जो अनुदेशक 10 वर्ष से अधिक समय से लगातार कार्य कर रहे हैं, उनकी नियुक्ति केवल अनुबंध आधारित नहीं मानी जा सकती। लंबे समय तक निरंतर सेवा के कारण ऐसे पद स्थायी प्रकृति के हो जाते हैं और अनुदेशकों को भी उसी आधार पर देखा जाना चाहिए।

₹7,000 मानदेय को बताया अनुचित

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि एक दशक से अधिक समय तक अनुदेशकों से केवल ₹7,000 प्रतिमाह पर कार्य कराना अनुचित श्रम व्यवस्था है, जो संविधान के अनुच्छेद 23 की भावना के विपरीत है। अदालत ने इसे बेगार जैसी स्थिति बताते हुए ऐसे शोषण को अस्वीकार्य माना।

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सरकार की दलील क्यों खारिज हुई?

उत्तर प्रदेश सरकार ने दलील दी थी कि यह केंद्र प्रायोजित योजना है और केंद्र से पर्याप्त धनराशि न मिलने के कारण राज्य सरकार पर पूरा आर्थिक भार नहीं डाला जा सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया और कहा कि कर्मचारियों के अधिकार वित्तीय व्यवस्था के आधार पर सीमित नहीं किए जा सकते।

अनुदेशकों के लिए फैसले का महत्व

इस आदेश के बाद प्रदेश के हजारों अनुदेशकों को वर्षों से लंबित बढ़े हुए मानदेय और बकाया भुगतान की उम्मीद मजबूत हो गई है। साथ ही उनकी सेवा की स्थिरता को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।