उत्तर प्रदेश के अनुदेशकों के मानदेय एवं सेवा संबंधी मामले में राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दाखिल रिव्यू पिटिशन (Review Petition) को खारिज कर दिया है।
23 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि 4 फरवरी 2026 के अपने पूर्व निर्णय में ऐसा कोई स्पष्ट त्रुटि (Error Apparent) नहीं है, जिसके आधार पर उस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए। इसलिए सरकार की रिव्यू याचिका स्वीकार नहीं की गई और उसे खारिज कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि ओपन कोर्ट में व्यक्तिगत सुनवाई (Personal Hearing) की मांग वाली अर्जी भी अस्वीकार की जाती है। इसके साथ ही सभी लंबित आवेदन (Pending Applications) भी निस्तारित कर दिए गए हैं।
इस आदेश के बाद 4 फरवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया मूल निर्णय यथावत प्रभावी रहेगा। ऐसे में अनुदेशक मानदेय प्रकरण में सरकार की पुनर्विचार की कोशिश सफल नहीं हो सकी।
अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया, यदि कोई होगी, तो वह संविधान और न्यायालय के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार ही आगे बढ़ेगी। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को अनुदेशकों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी उपलब्धि माना जा रहा है।



