भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर 'योग' आज वैश्विक स्तर पर निरोगी जीवन और मानसिक शांति का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता मिलने के बाद से हर वर्ष 21 जून को यह दिवस एक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। वर्ष 2026 में हम सब मिलकर 12वाँ अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाने जा रहे हैं। भागदौड़ भरी आधुनिक जिंदगी, काम के तनाव और डिजिटल व्यस्तता के बीच यह आयोजन वैश्विक मानवता को शारीरिक और मानसिक संतुलन का संदेश देने के लिए बेहद प्रासंगिक है।
आयोजन के सम्बन्ध में मुख्य बिंदु व दिशा-निर्देश:
- व्यापक जन-भागीदारी (Mass Participation): इस वर्ष के आयोजन का मुख्य लक्ष्य योग को केवल एक विशिष्ट वर्ग तक सीमित न रखकर हर घर, गाँव और नुक्कड़ तक पहुँचाना है ताकि आम जनमानस इससे जुड़ सके।
- विशेष केंद्रित विषय (Focus Areas): 12वें योग दिवस पर आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियों जैसे- मानसिक तनाव (Anxiety), अवसाद (Depression) और डिजिटल एडिक्शन से मुक्ति (Digital Detox) पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
- संस्थागत आयोजन: देश-विदेश के सभी शिक्षण संस्थानों (स्कूल, कॉलेज), सरकारी कार्यालयों, स्थानीय निकायों और कॉरपोरेट सेक्टर्स में सामूहिक योग सत्रों (Mass Yoga Demonstrations) के आयोजन के निर्देश दिए गए हैं।
- वर्कप्लेस योग (Yoga at Workplace): कामकाजी लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इस बार कार्यालयों में 'शॉर्ट-ब्रेक योग' या 'कुर्सी योग' (Chair Yoga) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
- हाइब्रिड और डिजिटल माध्यम: जो लोग सामूहिक आयोजनों में शामिल होने में असमर्थ हैं, उनके लिए विभिन्न ऐप्स, सोशल मीडिया और ऑनलाइन लाइव सत्रों के माध्यम से घर पर ही योग करने की सुविधा और प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
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