UP Transfer Policy 2026-27: यूपी में तबादलों का नया शासनादेश जारी, जानें सभी नियम
उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल द्वारा 05 मई, 2026 को राज्य के सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए वार्षिक स्थानान्तरण नीति 2026-27 जारी कर दी गई है। यह नीति पिछले वर्ष की नीति का स्थान लेगी और शासन के सभी विभागों (सचिवालय को छोड़कर) पर प्रभावी होगी।
स्थानान्तरण की समय-सीमा और प्रभावी अवधि
इस नीति के तहत वर्ष 2026-27 के लिए स्थानान्तरण की प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से प्रारंभ होकर 31 मई, 2026 तक पूर्ण की जानी अनिवार्य है। स्थानान्तरण हेतु पात्रता और अवधि की गणना के लिए 'कट-ऑफ' तिथि 31 मार्च, 2026 निर्धारित की गई है।
समूह 'क' एवं 'ख' के अधिकारियों के लिए नियम
समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों के स्थानांतरण के लिए कड़े मानदंड निर्धारित किए गए हैं:
- जनपद एवं मण्डल अवधि: जो अधिकारी एक जनपद में 03 वर्ष या एक मण्डल में कुल 07 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके हैं, उन्हें वहां से स्थानांतरित किया जाएगा।
- स्थानान्तरण की सीमा: संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की कुल संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही स्थानांतरण किए जा सकेंगे।
- वरीयता: स्थानांतरण में उन अधिकारियों को प्राथमिकता दी जाएगी जो सबसे अधिक समय से एक ही स्थान पर तैनात हैं।
- विभागाध्यक्ष कार्यालय: मुख्यालय में 03 वर्ष पूर्ण करने वाले अधिकारियों को मुख्यालय से बाहर तैनात किया जाएगा, बशर्ते बाहर समकक्ष पद उपलब्ध हों।
- अनुमोदन: 20 प्रतिशत की सीमा से अधिक स्थानांतरण के लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन अनिवार्य होगा। स्थानांतरण सत्र की समाप्ति के बाद किसी भी स्थानांतरण के लिए विभागीय मंत्री के माध्यम से मुख्यमंत्री की अनुमति लेनी होगी।
समूह 'ग' एवं 'घ' के कर्मचारियों के लिए नियम
इन समूहों के लिए स्थानांतरण की प्रक्रिया को अपेक्षाकृत सरल लेकिन नियंत्रित रखा गया है:
- स्थानान्तरण की सीमा: समूह 'ग' और 'घ' के लिए अधिकतम 10 प्रतिशत की सीमा निर्धारित है। अपरिहार्य स्थिति में विभागीय मंत्री के अनुमोदन से इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है।
- पटल परिवर्तन: समूह 'ग' के कार्मिकों के लिए पटल (Seat) और क्षेत्र परिवर्तन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
- स्थानान्तरण का आधार: 10 प्रतिशत की सीमा के भीतर सबसे अधिक समय से कार्यरत कार्मिकों का स्थानांतरण पहले किया जाएगा।
आकांक्षी जिले एवं विकासखण्ड (Aspirational Districts)
सरकार ने विकास की दृष्टि से पिछड़े क्षेत्रों में शत-प्रतिशत तैनाती पर विशेष जोर दिया है:
- संतृप्ति (Saturation): चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती और बहराइच जैसे 08 आकांक्षी जिलों तथा 100 आकांक्षी विकासखण्डों में सभी रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा।
- विकल्प: इन क्षेत्रों में तैनात कार्मिकों को 02 वर्ष की सेवा के बाद स्थानांतरण का विकल्प दिया जाएगा。
- नवनियुक्ति: सीधी भर्ती से आए नए कार्मिकों को इन क्षेत्रों में तैनाती में प्राथमिकता दी जाएगी।
- प्रतिस्थानी की अनिवार्यता: आकांक्षी जिलों और बुन्देलखण्ड में तैनात कार्मिकों को तब तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक उनका प्रतिस्थानी (Replacement) कार्यभार ग्रहण न कर ले।
मानवीय एवं विशेष दृष्टिकोण
नीति में व्यक्तिगत और विशेष परिस्थितियों का भी ध्यान रखा गया है:
- दिव्यांगता: 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले कार्मिकों या उनके आश्रितों को सामान्य स्थानांतरण से मुक्त रखा गया है। उनके स्थानांतरण केवल गंभीर शिकायतों या उनके स्वयं के अनुरोध पर ही किए जाएंगे।
- पति-पत्नी नीति: यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें यथासंभव एक ही जनपद या स्थान पर तैनात करने का प्रयास किया जाएगा।
- सेवानिवृत्ति: 02 वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले समूह 'ग' एवं 'घ' के कार्मिकों को उनके गृह जनपद में और समूह 'क' एवं 'ख' के कार्मिकों को (गृह जनपद छोड़कर) उनके इच्छित जनपद में तैनाती पर विचार किया जाएगा।
- चिकित्सा एवं शिक्षा: बच्चों की शिक्षा या गंभीर बीमारी जैसे व्यक्तिगत कारणों के आधार पर भी स्थानांतरण या समायोजन संभव है।
तकनीकी एवं पारदर्शी व्यवस्था
भ्रष्टाचार और पक्षपात रोकने के लिए शासन ने डिजिटल माध्यमों पर जोर दिया है:
- ऑनलाइन ट्रांसफर: समूह 'ख' और 'ग' के स्थानांतरण यथासंभव मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम के माध्यम से किए जाएंगे।
- मानव संपदा पोर्टल: स्थानांतरण आदेश, कार्यमुक्ति (Relieving) और कार्यभार ग्रहण (Joining) की समस्त प्रक्रिया मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ही अनिवार्य रूप से होगी। इसके बिना वेतन आहरण संभव नहीं होगा।
- वरीयता निर्धारण: मेरिट आधारित स्थानांतरण के लिए भारांक (Weightage) का निर्धारण अगस्त 2023 के शासनादेश के अनुसार किया जाएगा।
प्रशासनिक प्रतिबंध एवं अनुशासन
नीति में अनुशासन बनाए रखने के लिए सख्त प्रावधान हैं:
- गृह जनपद: समूह 'क' और 'ख' के अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनात नहीं किया जाएगा।
- मान्यता प्राप्त संघ: सेवा संघों के अध्यक्ष और सचिव का स्थानांतरण पदभार ग्रहण करने के 02 वर्ष तक नहीं किया जाएगा, जब तक कि उनके विरुद्ध भ्रष्टाचार या कदाचार के आरोप न हों।
- दबाव पर कार्यवाही: यदि कोई कार्मिक स्थानांतरण रुकवाने के लिए बाहरी दबाव डलवाता है, तो उसके विरुद्ध 'सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956' के तहत दंडात्मक कार्यवाही और निलम्बन पर विचार किया जाएगा।
- कार्यमुक्ति: स्थानांतरण आदेश जारी होने के एक सप्ताह के भीतर कार्मिक को कार्यमुक्त होना होगा। ऐसा न करना अनुशासनहीनता मानी जाएगी और संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाएगी।
अन्य महत्वपूर्ण बिंदु
- चार्ज नोट: स्थानांतरण के बाद अधिकारी को अपने कार्यों और महत्वपूर्ण परियोजनाओं के संबंध में एक 'चार्ज नोट' तैयार करना होगा ताकि नए अधिकारी को कार्य समझने में आसानी हो।
- सत्यनिष्ठा: संदिग्ध सत्यनिष्ठा वाले कार्मिकों को किसी भी संवेदनशील पद पर तैनात नहीं किया जाएगा।
- विचलन: इस नीति के किसी भी नियम में बदलाव के लिए कार्मिक विभाग के परामर्श के बाद मुख्यमंत्री का अनुमोदन आवश्यक होगा।
यह नीति राज्य प्रशासन में पारदर्शिता लाने, विकास कार्यों को गति देने और सरकारी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से लागू की गई है। अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है कि वे इस नीति का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें।


