प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए एक बार फिर व्यवस्था आड़े आ रही है। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग ने फुर्ती दिखाते हुए रिक्त पदों का ब्योरा तो भेज दिया, लेकिन यह पूरी कसरत 'ऑफलाइन' होने के कारण फिलहाल फाइलों में ही दबी नजर आ रही है। तकनीकी पेंच यह है कि जब तक एनआईसी (NIC) का ऑनलाइन पोर्टल तैयार नहीं होता, तब तक उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं कर पाएगा।
आनन-फानन में भेजी सूचना, तकनीक बनी बाधा
मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापकों के 11,508 रिक्त पदों की सूचना उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेज दी। लेकिन यह पूरी सूचना ऑफलाइन भेजी गई है।
चयन आयोग के नियमों के मुताबिक, भर्ती की आधिकारिक प्रक्रिया तभी शुरू हो सकती है जब एनआईसी द्वारा विकसित पोर्टल पर ऑनलाइन अधियाचन (रिक्विजिशन) प्राप्त हो। आयोग के अधिकारियों की मानें तो इस पोर्टल को पूरी तरह से तैयार और लाइव होने में कम से कम दो महीने का समय लगेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि युवाओं को नई भर्ती के लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा।
माध्यमिक और उच्च शिक्षा का भी यही हाल
सिर्फ प्राथमिक ही नहीं, बल्कि माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग में भी यही स्थिति बनी हुई है। पूर्व अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) सुरेंद्र कुमार तिवारी ने 14 मई को ही रिक्त 23,213 पदों की ऑफलाइन सूचना आयोग को भेज दी थी। इसमें अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (PGT) और सहायक अध्यापक (TGT) के पद शामिल हैं। इसके अलावा एडेड कॉलेजों में प्राचार्य और असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भी खाली हैं।
एक नज़र आंकड़ों पर:
- परिषदीय स्कूल (सहायक अध्यापक): 11,508 पद
- माध्यमिक व एडेड कॉलेज (TGT, PGT व अन्य): 23,213 पद
- कुल अटकीं भर्तियां: 34,721 पद
कागजों पर पोर्टल, जमीन पर सन्नाटा
दिलचस्प बात यह है कि चयन आयोग ने माध्यमिक स्कूलों और एडेड कॉलेजों के रिक्त पदों का ब्योरा जुटाने के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित कर लिया है। इसके बावजूद, दोनों में से किसी भी विभाग ने अभी तक ऑनलाइन अधियाचन भेजने की प्रक्रिया शुरू नहीं की है।
अभ्यर्थियों में निराशा
एक तरफ सरकार जल्द से जल्द भर्तियां पूरी करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विभागीय सुस्ती और तकनीकी देरी के कारण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऑफलाइन सूचना भेजने की जल्दबाजी ने अधिकारियों की जिम्मेदारी तो कागजों पर पूरी कर दी, लेकिन बेरोजगार युवाओं के हाथ फिलहाल खाली ही हैं। जब तक पोर्टल की 'हरी झंडी' नहीं मिलती, तब तक विज्ञापन जारी होना मुमकिन नहीं दिख रहा है।


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