उत्तर प्रदेश। भारत की जनगणना-2027 की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। इस महाअभियान को सफल बनाने की मुख्य जिम्मेदारी एक बार फिर शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों के कंधों पर है। हाल ही में जनपद शाहजहाँपुर के कार्यालय प्रमुख जनगणना अधिकारी/जिलाधिकारी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र ने प्रदेश भर के कर्मचारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इस पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि जनगणना कार्य के लिए तैनात किए गए पर्यवेक्षकों और प्रगणकों को उनके 'तैनाती स्थल के आसपास' ही ड्यूटी आवंटित की जाए।
आदेश का मुख्य अंश और उद्देश्य
शाहजहाँपुर प्रशासन द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि जो भी पर्यवेक्षक या प्रगणक (ज्यादातर शिक्षक) नामित किए गए हैं, उन्हें उनके वर्तमान कार्यस्थल के समीप ही एच.एल.बी. (HLB) आवंटित की जाए।
इस निर्णय के पीछे का मुख्य उद्देश्य यह है कि:
- कर्मचारियों को लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
- समय की बचत हो और कार्य ससमय पूर्ण किया जा सके।
- महिला शिक्षकों और अस्वस्थ कर्मचारियों को होने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को कम किया जा सके।
क्यों है इसे पूरे राज्य में लागू करने की जरूरत?
आमतौर पर देखा गया है कि जनगणना या चुनावी ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को उनके स्कूल या ब्लॉक से 30-40 किलोमीटर दूर तैनात कर दिया जाता है। इससे न केवल उनके मूल विद्यालय का कार्य प्रभावित होता है, बल्कि दूरदराज के क्षेत्रों में पहुँचने और डेटा संकलन में काफी ऊर्जा व्यर्थ होती है।
यदि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में इसी 'शाहजहाँपुर मॉडल' को अपनाया जाता है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे:
- कार्यक्षमता में वृद्धि: जब कर्मचारी अपने परिचित भौगोलिक क्षेत्र में कार्य करेगा, तो वह अधिक तेजी और सटीकता से जनगणना के आंकड़े जुटा पाएगा।
- मानसिक राहत: तैनाती स्थल के पास ड्यूटी मिलने से कर्मचारियों का तनाव कम होगा, जिससे वे 'सेल्फ-इन्यूमरेट' (Self-Enumeration) जैसे नए डिजिटल प्रावधानों को जनता तक बेहतर ढंग से पहुँचा सकेंगे।
- आर्थिक बचत: लंबी यात्रा न करने के कारण ईंधन और परिवहन पर होने वाले व्यक्तिगत व सरकारी खर्च में कमी आएगी।
निष्कर्ष
जनगणना राष्ट्र निर्माण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है। ऐसे में कार्य करने वाली मशीनरी (शिक्षक एवं कर्मचारी) की सुविधाओं का ख्याल रखना शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। शाहजहाँपुर जिलाधिकारी का यह आदेश न केवल प्रशासनिक कुशलता को दर्शाता है, बल्कि कर्मचारियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण को भी प्रकट करता है।
शिक्षक संगठनों और कर्मचारी संघों की अब यह मांग है कि शासन स्तर से एक सामान्य निर्देश जारी कर सभी जिलाधिकारियों को इसी तर्ज पर ड्यूटी चार्ट तैयार करने हेतु निर्देशित किया जाए, ताकि "अनावश्यक कठिनाई" के बिना इस राष्ट्रीय पर्व को सफल बनाया जा सके।


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