लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अब जन्म और मृत्यु का पंजीकरण समय पर कराना बेहद जरूरी हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में 'जन्म और मृत्यु पंजीकरण नियमावली' को मंजूरी दे दी गई है। नए नियमों के मुताबिक, यदि जन्म या मृत्यु की सूचना तय समय सीमा के बाद दी जाती है, तो आवेदक को लेट फीस (विलंब शुल्क) देनी होगी। यह शुल्क देरी की अवधि के हिसाब से बढ़ता जाएगा।
समय पर सूचना देने पर कोई चार्ज नहीं, देरी पर जेब होगी ढीली
कैबिनेट के फैसले के अनुसार, पंजीकरण के लिए समय-सीमा और उससे जुड़े शुल्कों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है:
- 21 दिन के भीतर: यदि जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 21 दिनों के अंदर दी जाती है, तो रजिस्ट्रार के आदेश से प्रमाण पत्र बिल्कुल मुफ्त (निशुल्क) जारी किया जाएगा।
- 21 से 30 दिन के भीतर: 21 दिन बीतने के बाद और 30 दिनों के अंदर सूचना देने पर 20 रुपये का शुल्क लिया जाएगा।
- 1 महीने से 1 साल के भीतर: यदि सूचना एक महीने के बाद लेकिन एक साल से पहले दी जाती है, तो 50 रुपये फीस लगेगी। इस स्थिति में रजिस्ट्रार सीधे सर्टिफिकेट जारी नहीं कर सकेंगे; इसके लिए जिला रजिस्ट्रार या अपर जिला रजिस्ट्रार की अनुमति अनिवार्य होगी।
- 1 साल के बाद: एक साल की अवधि बीत जाने के बाद सूचना देने पर आवेदक को 100 रुपये की लेट फीस देनी होगी।
रिकॉर्ड न होने पर मिलेगा 'अनुपलब्धता प्रमाण पत्र'
कैबिनेट ने उन मामलों के लिए भी नियम स्पष्ट किए हैं जहाँ पुराना रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।
महत्वपूर्ण प्रावधान: अगर किसी व्यक्ति के जन्म या मृत्यु का कोई रिकॉर्ड सरकारी तंत्र में दर्ज नहीं मिलता है, तो उसे 'रिकॉर्ड की अनुपलब्धता का प्रमाण पत्र' (Non-Availability Certificate) जारी किया जाएगा। इसके लिए आवेदक को 20 रुपये का शुल्क देना होगा।
अन्य जरूरी शुल्क:
- सर्च फीस (खोज शुल्क): यदि पहले साल किसी प्रमाण पत्र के बारे में जानकारी या रिकॉर्ड खोजना है, तो 20 रुपये देने होंगे। इसके बाद जितने अतिरिक्त वर्षों का रिकॉर्ड खोजा जाएगा, प्रति वर्ष 20 रुपये अलग से जुड़ते जाएंगे।
- डुप्लिकेट सर्टिफिकेट: यदि आपको अपने जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र की दूसरी प्रति (दोबारा) चाहिए, तो इसके लिए 50 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।


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