हाल ही में दिग्गज कंसल्टिंग फर्म एओन (Aon) द्वारा जारी एक रिपोर्ट ने भारतीय नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी दी है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत इस साल प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच सबसे ज्यादा वेतन वृद्धि (Salary Hike) देने वाला देश बना हुआ है।
वैश्विक तुलना: कहाँ खड़ा है भारत?
भारत में इस साल औसत वेतन वृद्धि 9.1% दर्ज की गई है। यह आंकड़ा 1,400 से अधिक कंपनियों के डेटा पर आधारित है। विकसित देशों की तुलना में भारत की बढ़त काफी आगे है: जहाँ चीन में 4.8%, अमेरिका में 4.3% और ब्रिटेन में 4.1% की वृद्धि देखी गई, वहीं भारत 9% के आंकड़े को पार कर गया है।
जूनियर स्तर के कर्मचारियों को अधिक लाभ
इस साल कंपनियों ने सीनियर अधिकारियों के मुकाबले जूनियर लेवल के कर्मचारियों पर ज्यादा भरोसा दिखाया है। डेटा के अनुसार:
- जूनियर लेवल पर सबसे अधिक 9.6% की वृद्धि हुई है।
- मिडल लेवल के कर्मचारियों को 9.0% का हाइक मिला है।
- टॉप लेवल मैनेजमेंट के लिए यह आंकड़ा 8.5% रहा।
कंपनियों का मानना है कि जूनियर स्तर के टैलेंट को रोकना ज्यादा किफायती है, क्योंकि नए व्यक्ति को नियुक्त करने (रिप्लेसमेंट) का खर्च बहुत ज्यादा होता है।
सेक्टर के अनुसार बढ़त: कहाँ मिला सबसे ज्यादा फायदा?
वेतन वृद्धि के मामले में इस साल रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर सबसे आगे रहे, जहाँ 10.2% की भारी बढ़त देखी गई। इसके बाद NBFC क्षेत्र में 10.1% और ऑटोमोटिव व इंजीनियरिंग डिजाइन में 9.9% की वृद्धि दर्ज की गई। मैन्युफैक्चरिंग (9.4%) और FMCG (9.1%) ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जबकि बैंकिंग में 8.8% और टेक कंसल्टिंग में 6.6% की औसत बढ़त रही।
कैसे तय होगी आपकी भूमिका?
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आपकी वेतन वृद्धि 8% से 10% के बीच है, तो आपकी नौकरी और परफॉरमेंस स्थिर मानी जाती है। लेकिन यदि आपको 12% से ज्यादा का इंक्रीमेंट मिला है, तो आप 'हाई डिमांड' वाली भूमिका में हैं और कंपनी आपको हर हाल में अपने साथ बनाए रखना चाहती है।
निष्कर्ष: यदि आपको इस साल 9% या उससे अधिक का इंक्रीमेंट मिला है, तो बधाई हो! आप देश के औसत प्रदर्शन के बराबर या उससे बेहतर स्थिति में हैं।


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