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पंचायत चुनाव में अब 'तीसरी आँख' का पहरा: फेशियल रिकग्निशन से रुकेगी फर्जी वोटिंग

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में राज्य निर्वाचन आयोग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब बूथों पर फर्जी मतदान करना नामुमकिन होगा, क्योंकि आयोग ने फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) यानी चेहरा पहचान प्रणाली का सफलतापूर्वक परीक्षण कर लिया है। तकनीक के इस इस्तेमाल से लोकतंत्र के सबसे जमीनी स्तर के चुनावों में शुचिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

UP Panchayat Chunav Facial Recognition System Testing

कुशीनगर और शाहजहांपुर में हुआ सफल ट्रायल

​राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह के अनुसार, इस आधुनिक तकनीक का पहला प्रयोग उपचुनावों के दौरान किया गया।

  • स्थान: शाहजहांपुर की कटरा नगर पंचायत और कुशीनगर की फाजिलनगर नगर पंचायत।
  • दायरा: इस परीक्षण में कुल 50,257 मतदाता शामिल हुए।
  • उपलब्धि: यह देश में अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जहाँ किसी चुनाव में इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं की पहचान डिजिटल तकनीक से की गई।

कैसे काम करता है यह डिजिटल सुरक्षा घेरा?

​चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों के स्मार्टफोन्स में एक विशेष FRS एप्लिकेशन इंस्टॉल किया गया है। यह तकनीक निम्नलिखित चरणों में काम करती है:

  1. तत्काल पहचान: जब कोई मतदाता वोट डालने पहुँचता है, तो सिस्टम उसके चेहरे का मिलान डेटाबेस से करता है।
  2. डुप्लीकेट वोटिंग पर रोक: यदि कोई व्यक्ति एक बार वोट डालने के बाद अपना भेष बदलकर या किसी दूसरे बूथ पर दोबारा मतदान की कोशिश करता है, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी कर देता है।
  3. एप्लीकेशन लॉक: सुरक्षा के लिहाज से मतदान प्रक्रिया के दौरान मोबाइल पर केवल यही ऐप सक्रिय रहता है, ताकि डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके।

भविष्य की तैयारी: बड़े स्तर पर लागू करने की योजना

​इस सफल प्रयोग के बाद अब इसे आगामी बड़े चुनावों में व्यापक स्तर पर लागू करने की संभावना बढ़ गई है। निर्वाचन आयोग का मानना है कि इस तकनीक से न केवल फर्जी मतदान रुकेगा, बल्कि उन क्षेत्रों में भी शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित होगा जहाँ अक्सर विवाद की स्थिति बनी रहती है।

"चेहरा पहचान प्रणाली के सफल परीक्षण से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का नया युग शुरू होगा। तकनीक की मदद से हम हर एक वोट की कीमत और उसकी प्रमाणिकता सुनिश्चित कर रहे हैं।"राज्य निर्वाचन आयोग

​पंचायत चुनावों में तकनीक का यह समावेश यूपी को चुनावी सुधारों के मामले में अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा करता है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब 'फर्जी वोटर' बीते कल की बात हो जाएंगे और असल जनादेश सुरक्षित रहेगा।