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जिले में 5 साल से 'लापता' 10 शिक्षकों और 3 कर्मचारियों पर गिरी गाज, बर्खास्तगी की तैयारी

Sir Ji Ki Pathshala

बुलंदशहर। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने वालों पर कड़ा प्रहार किया है। पिछले पांच वर्षों से बिना किसी आधिकारिक सूचना के गायब चल रहे 10 शिक्षकों और 3 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवा समाप्ति की तैयारी पूरी कर ली गई है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जवाब न मिलने पर विभाग अब इनकी बर्खास्तगी की फाइल आगे बढ़ा चुका है।

BSA Bulandshahr Office and Uttar Pradesh Basic Shiksha Vibhag News

नोटिस की अनदेखी पड़ी भारी

​बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय ने बताया कि जिले के परिषदीय स्कूलों में लंबे समय से अनुपस्थित चल रहे कर्मियों की ब्लॉकवार रिपोर्ट मांगी गई थी। जांच में सामने आया कि 13 ऐसे कर्मचारी हैं जो पिछले आधा दशक से स्कूल नहीं आए हैं। विभाग ने उनके आवास पर नोटिस भेजकर पक्ष रखने का मौका दिया था, लेकिन न तो कोई ड्यूटी पर लौटा और न ही किसी ने स्पष्टीकरण दिया।

​बीईओ (BEO) से मिली अंतिम रिपोर्ट के आधार पर अब इन सभी की छुट्टी तय मानी जा रही है।

शिक्षण कार्य छोड़ अचानक हुए थे लापता

​जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ये 10 शिक्षक सहायक अध्यापक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती हुए थे। नियुक्ति के बाद शुरुआती कुछ समय तक इन्होंने स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और शिक्षण कार्य भी किया, लेकिन उसके बाद ये अचानक बिना किसी इस्तीफे या अवकाश प्रार्थना पत्र के गायब हो गए।

​विभाग को अंदेशा है कि ये शिक्षक किसी अन्य सरकारी विभाग या निजी क्षेत्र में सेवाएं दे रहे हैं और बिना इस्तीफा दिए अपनी पुरानी नौकरी को भी लटकाए हुए थे।

प्रशासन की सख्त चेतावनी

​विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बार-बार दी गई चेतावनियों की अनदेखी यह दर्शाती है कि ये कर्मचारी अब सरकारी सेवा में बने रहने के इच्छुक नहीं हैं।

डॉ. लक्ष्मीकांत पांडेय (BSA, बुलंदशहर) के अनुसार, "पांच वर्षों से बिना सूचना गायब रहना गंभीर अनुशासनहीनता है। ऐसे कर्मियों की वजह से स्कूलों की व्यवस्था प्रभावित होती है। अब इन सभी 13 कर्मियों (10 शिक्षक और 3 कर्मचारी) की सेवा समाप्ति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।"

​इस सख्त कार्रवाई से विभाग के अन्य अनुपस्थित चल रहे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। माना जा रहा है कि इस फैसले से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित होगा।