लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के अधीन कार्यरत लाखों सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। प्रदेश सरकार वर्ष 2026-27 के लिए जल्द ही नई स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) जारी करने जा रही है। शासन की योजना है कि स्थानांतरण की पूरी प्रक्रिया को मई माह के अंत तक संपन्न कर लिया जाए, ताकि सरकारी कार्यों में सुगमता बनी रहे।
1. तबादलों के दायरे में कौन आएगा?
प्रस्तावित नीति के अनुसार, जो कार्मिक एक ही जिले में 3 वर्ष और एक ही मंडल में 7 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें स्थानांतरण नीति के दायरे में रखा जाएगा। विशेष रूप से समूह 'क' से लेकर 'घ' तक के सभी संवर्गों के लिए अलग-अलग मानक तय किए जा रहे हैं।
2. स्थानांतरण की अधिकतम सीमा (कैपिंग)
प्रशासनिक कार्यों में बाधा न आए, इसके लिए तबादलों की एक अधिकतम सीमा निर्धारित की गई है:
- समूह 'क' और 'ख': संवर्ग में कार्यरत कुल अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20% तक तबादले किए जा सकेंगे।
- समूह 'ग' और 'घ': इन श्रेणियों में संवर्गवार कुल कार्मिकों की संख्या के अधिकतम 10% तक ही स्थानांतरण किए जाएंगे।
3. समूह 'ग' के लिए विशेष नियम और प्राथमिकता
समूह 'ग' के कर्मचारियों के लिए नीति में पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण पर विशेष जोर दिया गया है:
- मेरिट बेस्ड ऑनलाइन सिस्टम: भ्रष्टाचार और सिफारिशी संस्कृति को खत्म करने के लिए तबादले यथासंभव 'मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम' के जरिए होंगे।
- पटल परिवर्तन: एक ही पटल पर लंबे समय से जमे कर्मचारियों का पटल और क्षेत्र परिवर्तन (Field Change) कड़ाई से लागू किया जाएगा।
- संवेदनशील निर्णय: ऐसे कर्मचारी जिनके बच्चे मंदबुद्धि हैं या गंभीर दिव्यांगता (चलने-फिरने में असमर्थ) से जूझ रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। उनके बच्चों के समुचित इलाज की सुविधा को देखते हुए उन्हें उनकी पसंद या इलाज वाले स्थानों पर तैनात किया जाएगा।
4. चुनाव और जनगणना का प्रभाव
आगामी जनगणना और पंचायत चुनावों की व्यस्तता को देखते हुए कार्मिक विभाग इस बार अतिरिक्त तत्परता दिखा रहा है। यही कारण है कि तबादला नीति को अप्रैल-मई में ही लागू करने की तैयारी है, ताकि चुनाव और जनगणना के कार्यों के दौरान अधिकारी और कर्मचारी अपने नए कार्यस्थलों पर पूरी तरह सेटल हो सकें।
निष्कर्ष: स्थानांतरण नीति का मसौदा फिलहाल उच्च स्तर पर विचार-विमर्श के लिए भेजा गया है। कैबिनेट की मंजूरी मिलते ही इसे विधिवत लागू कर दिया जाएगा, जिससे प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा फेरबदल देखने को मिलेगा।


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