लखनऊ | उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक शिक्षा अनुभाग-5 ने माननीय उच्च न्यायालय, इलाहाबाद और उसकी लखनऊ खंडपीठ में विचाराधीन विभिन्न रिट याचिकाओं तथा अवमानना वादों की समीक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन द्वारा जारी ताजा आदेश के अनुसार, विभाग में लंबित कानूनी प्रकरणों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई गई है।
बैठक का समय और स्थान
संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय द्वारा जारी पत्र के अनुसार, यह बैठक 27 अप्रैल, 2026 को दोपहर 12:00 बजे विशेष सचिव, उ०प्र० शासन (श्री अवधेश कुमार तिवारी) के कार्यालय कक्ष में आयोजित की जाएगी।
बैठक का मुख्य एजेंडा
शासन ने उन जनपदों के प्रति कड़ी नाराजगी जताई है जहाँ से बार-बार निर्देश देने के बावजूद अभी तक 'आख्या' (रिपोर्ट) प्राप्त नहीं हुई है। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित 5 प्रकरणों पर चर्चा और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी:
1. मृतक आश्रित नियुक्ति (जनपद अमेठी)
- याचिका: गया प्रसाद द्विवेदी बनाम उ०प्र० राज्य (550/2024)
- विवरण: सगे भाई को मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति देने से जुड़ा मामला।
2. अवकाश नकदीकरण (जनपद ललितपुर)
- याचिका: द्वारिका प्रसाद जोशी बनाम उ०प्र० राज्य (12617/2025)
- विवरण: परिषदीय लिपिक के अर्जित अवकाश के नकदीकरण हेतु संशोधित रिपोर्ट न मिलने पर चर्चा।
3. सफाई कर्मी भर्ती एवं अवमानना (जनपद सीतापुर)
- अवमानना वाद: रमेश सिंह व अन्य बनाम श्री संजय शुक्ला (2098/2014)
- विवरण: सफाई कर्मियों की भर्ती से जुड़ा 10 साल से अधिक पुराना मामला, जिसमें अभी तक रिपोर्ट लंबित है।
4. सेवायोजन प्रकरण (जनपद संतकबीर नगर)
- याचिका: श्री गोविन्द प्रकाश बनाम उ०प्र० राज्य (1486/2026)
- विवरण: मृतक आश्रित के रूप में सेवायोजन की मांग पर विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की समीक्षा।
5. पुरानी भर्ती का विवाद (लखनऊ खंडपीठ)
- अवमानना वाद: लीलाधर माथुर व अन्य (2663/2013)
- विवरण: सफाई कर्मियों की नियुक्ति से संबंधित दशक पुराना प्रकरण।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
इस बैठक में संबंधित जनपदों (अमेठी, ललितपुर, सीतापुर, संतकबीर नगर) के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को अनिवार्य रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि वे अपने साथ मामले से संबंधित सभी सुसंगत अभिलेख और अद्यतन सूचनाएं लेकर आएं ताकि न्यायालय के समक्ष सही तथ्य प्रस्तुत किए जा सकें और लंबित वादों का त्वरित निस्तारण संभव हो सके।
निष्कर्ष
यह बैठक दर्शाती है कि शासन अब न्यायिक प्रक्रियाओं में हो रही देरी को लेकर गंभीर है। विशेष रूप से 'अवमानना वाद' (Contempt of Court) जैसे संवेदनशील मामलों में अधिकारियों की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समयबद्ध रिपोर्ट न देने वाले अधिकारियों पर आने वाले दिनों में कार्रवाई की भी संभावना है।


