मुजफ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए उन शिक्षकों को वापस उनके पुराने स्कूलों में भेजने का आदेश जारी किया है, जिनके स्थानांतरण (Transfer) के बाद संबंधित विद्यालय 'शिक्षक विहीन' या 'एकल शिक्षक' (Single Teacher) की श्रेणी में आ गए थे। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए एक महत्वपूर्ण फैसले के अनुपालन में की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
सत्र 2025-26 के लिए जिले के भीतर शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन की प्रक्रिया चलाई गई थी। शासन की नीति के अनुसार, किसी भी शिक्षक को ऐसे विद्यालय से कार्यमुक्त (Relieve) नहीं किया जाना था, जहाँ उनके जाने से विद्यालय में एक भी शिक्षक न बचे या विद्यालय केवल एक शिक्षक के भरोसे रह जाए।
बावजूद इसके, कुछ शिक्षक कार्यमुक्त होकर नए विद्यालयों में शामिल हो गए थे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय ने पूर्व में इन शिक्षकों को वापस भेजने के निर्देश दिए थे, जिसे कुछ शिक्षकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख
माननीय उच्च न्यायालय ने याचिका संख्या 18552/2025 की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी आदेश (GO) दिनांक 08.08.2025 के प्रावधान बिल्कुल स्पष्ट हैं। कोर्ट ने माना कि:
- यदि स्थानांतरण से कोई स्कूल शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक वाला होता है, तो शिक्षक को कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा।
- यदि शिक्षक कार्यमुक्त होकर नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण कर चुके हैं, तो उन्हें अनिवार्य रूप से मूल विद्यालय में वापस भेजा जाएगा।
न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए बीएसए के आदेश को सही ठहराया और इसमें किसी भी प्रकार की वैधानिकता की कमी नहीं पाई।
BSA मुजफ्फरनगर का नया आदेश
हाईकोर्ट के निर्णय के बाद, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी मुजफ्फरनगर ने 19 अप्रैल 2026 को नया पत्र जारी कर सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश दिए हैं।
मुख्य निर्देश: "जिन अध्यापकों के स्थानांतरण से मूल विद्यालय शिक्षक विहीन या एकल हो गए हैं, उन्हें एक सप्ताह के भीतर तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर उनके मूल विद्यालय में वापस भेजा जाए।"
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या कोताही बरती जाती है, तो इसकी समस्त जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों की होगी। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरटीई (RTE) मानकों के अनुरूप हर स्कूल में पर्याप्त शिक्षक मौजूद हों ताकि बच्चों की शिक्षा बाधित न हो।

