इलाहाबाद: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में 'सरप्लस' (अतिशेष) शिक्षकों के पुनर्नियोजन (Redeployment) की प्रक्रिया को लेकर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत शिक्षकों का समायोजन अनिवार्य है, लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में वस्तुनिष्ठता और पारदर्शिता का होना अत्यंत आवश्यक है।
मुख्य विवाद: डेटा की शुद्धता और प्रक्रिया का समय
विशेष अपील संख्या 398/2026 (सौरभ कुमार सिंह एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य) की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित किया:
- पुराना डेटा और समय: याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि समायोजन की प्रक्रिया जुलाई-अगस्त 2025 में ही पूरी हो चुकी थी। ऐसे में शैक्षिक सत्र 2025-26 के बीच में दोबारा इस प्रक्रिया को शुरू करने का कोई औचित्य नहीं है।
- UDISE पोर्टल की खामियां: कोर्ट में यह मुद्दा उठाया गया कि UDISE पोर्टल पर मौजूद छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) का डेटा त्रुटिपूर्ण है। प्रभावित शिक्षकों और संस्थानों को इस डेटा को सुधारने या अपनी व्यक्तिगत समस्याओं (Hardships) को रखने का कोई मौका नहीं दिया गया।
कम छात्र संख्या वाले स्कूलों पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण पहलू यह सामने आया कि जहाँ आरटीई के तहत हर स्कूल में कम से कम दो शिक्षक होने चाहिए, वहीं कोर्ट ने तर्क दिया कि यदि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या बहुत कम है, तो वहां दो शिक्षक तैनात करना सरकारी धन का दुरुपयोग और अव्यावहारिक हो सकता है।
कोर्ट ने सुझाव दिया कि जिन प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या बहुत कम (जैसे 9 तक) है, वहां के छात्रों को अन्य नजदीकी संस्थानों में समायोजित किया जा सकता है, ताकि सरकारी संसाधनों का अधिकतम और उचित उपयोग हो सके।
कोर्ट का निर्देश और अगली सुनवाई
उच्च न्यायालय ने इस मामले में निम्नलिखित निर्देश दिए हैं:
- पारदर्शी तंत्र: पूरी समायोजन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और इसे 15 जून 2026 तक पूरा करने का प्रयास किया जाए, ताकि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल सुचारू रूप से खुल सकें।
- सरकारी पक्ष: मुख्य स्थायी अधिवक्ता (CSC) को इस मामले में नए लिखित निर्देश प्राप्त करने और प्रक्रिया को बेहतर बनाने के सुझाव देने को कहा गया है।
- अंतरिम राहत बरकरार: एकल न्यायाधीश द्वारा पूर्व में दी गई अंतरिम सुरक्षा (Interim Protection) अगली सुनवाई तक जारी रहेगी।
अगली सुनवाई की तिथि: इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 अप्रैल 2026 को होगी।



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