लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन के बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा 'स्कूल चलो अभियान-2026' को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। अपर मुख्य सचिव, पार्थ सारथी सेन शर्मा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र (सं०: 230/ए०सी०एस०/2026) के माध्यम से प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
जनप्रतिनिधियों का सक्रिय सहयोग
मुख्यमंत्री द्वारा 04 अप्रैल 2026 को किए गए अभियान के उद्घाटन के क्रम में, सभी BSA को अपने जनपद के माननीय सांसदों, विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों से संपर्क करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य उनकी सुविधा के अनुसार समन्वय स्थापित कर अभियान के लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त करना है।
नामांकन के 5 प्रमुख लक्ष्य
शासन ने नामांकन को लेकर निम्नलिखित 5 प्राथमिकताएं तय की हैं:
- बाल-वाटिका: 03 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे का आंगनवाड़ी केंद्र या बाल-वाटिका में पंजीकरण।
- कक्षा-1: 06 वर्ष के प्रत्येक बच्चे का अनिवार्य दाखिला।
- ड्रॉप आउट रिकवरी: स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा मुख्यधारा में लाना।
- कक्षा-6 में प्रवेश: कक्षा-5 उत्तीर्ण कर चुके सभी बच्चों का अगली कक्षा में नामांकन।
- कक्षा-9 में प्रवेश: कक्षा-8 उत्तीर्ण छात्रों का अनिवार्य रूप से हाईस्कूल स्तर पर दाखिला।
18 प्रमुख योजनाओं और गतिविधियों की जानकारी देना अनिवार्य
अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे जनप्रतिनिधियों को विभाग की निम्नलिखित 18 योजनाओं से अवगत कराएं:
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT): यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग और स्टेशनरी हेतु।
- निःशुल्क सामग्री: पाठ्य-पुस्तकें एवं कार्य-पुस्तिकाओं का वितरण।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: स्कूलों का पुनर्निर्माण, मरम्मत, अतिरिक्त कक्षाओं का निर्माण और फर्नीचर (डेस्क-बेंच) की उपलब्धता।
- ऑपरेशन कायाकल्प: विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण हेतु किए जा रहे कार्य।
- मॉडल स्कूल: मुख्यमंत्री मॉडल कम्पोजिट एवं अभ्युदय कम्पोजिट विद्यालयों की स्वीकृतियां।
- डिजिटल शिक्षा: मिशन निपुण की उपलब्धियां, ICT लैब और स्मार्ट क्लास की स्थापना।
- विशिष्ट विद्यालय: कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय एवं 'पीएम श्री' विद्यालयों के कार्य।
- समावेशी शिक्षा: दिव्यांग बच्चों हेतु DBT एवं निःशुल्क उपकरण।
- सामाजिक सुरक्षा: RTE एक्ट के तहत निजी स्कूलों में दुर्बल वर्ग के बच्चों का प्रवेश।
- प्रशिक्षण एवं पोषण: डाइट (DIET) के माध्यम से प्रशिक्षण और पी०एम० पोषण (Mid-day Meal) योजना।
- अतिरिक्त प्रयास: जनपद में CSR फंड से कराए गए अन्य महत्वपूर्ण कार्य।
विधायक एवं सांसद निधि का उपयोग
शासन की मंशा है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा अपनी आयु के अनुसार निर्धारित कक्षा में प्रवेश से वंचित न रहे। इसके लिए BSA को निर्देश दिया गया है कि वे जनप्रतिनिधियों से उनकी निधि (Fund) के माध्यम से शिक्षा क्षेत्र में अधिक धनराशि खर्च करने का अनुरोध करें, ताकि नवीनतम तकनीक के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराई जा सके।
संयुक्त समन्वय और प्रभावी अनुपालन
प्रभावी क्रियान्वयन के लिए BSA को अपने जनपद के जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) के साथ मिलकर संयुक्त रूप से कार्य करने को कहा गया है। पत्र के अंत में स्पष्ट निर्देश है कि इन नियमों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।
स्रोत: कार्यालय अपर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन।



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