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स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य नहीं: लोकसभा में ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर का बयान

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली: देश भर में बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को लेकर चल रही असमंजस और विवादों के बीच केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने लोकसभा में आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि घरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाना अनिवार्य (Mandatory) नहीं है, बल्कि यह एक वैकल्पिक (Optional) व्यवस्था है।

Smart prepaid meter not mandatory

​संसद में गूंजा मीटर का मुद्दा

​संसद के मानसून सत्र के दौरान प्रश्नकाल में आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के सदस्य हनुमान बेनीवाल ने प्रीपेड मीटरों को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों का मुद्दा उठाया। सांसदों ने दावा किया कि कई क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को जबरन ये मीटर लगाने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

​इन सवालों का जवाब देते हुए ऊर्जा मंत्री ने साफ किया कि केंद्र की ओर से ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। उन्होंने कहा कि "प्रीपेड स्मार्ट मीटर एक वैकल्पिक व्यवस्था है और इसे अनिवार्य नहीं बनाया गया है।"

​जबरन मीटर लगाने पर होगी कार्रवाई

​मंत्री महोदय ने उन खबरों और दावों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि कुछ राज्यों में इसे जबरन थोपा जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि:

  • ​किसी भी प्रदेश में जबरन स्मार्ट मीटर लगाने का कोई समाचार या आधिकारिक आदेश सरकार के पास नहीं है।
  • ​यदि किसी उपभोक्ता को इसके लिए बाध्य (Force) किया जाता है और इसकी शिकायत प्राप्त होती है, तो सरकार उस पर उचित संज्ञान लेगी और आवश्यक कार्रवाई करेगी।

​प्रीपेड मीटर की जरूरत क्यों?

​हालांकि सरकार ने इसे वैकल्पिक बताया है, लेकिन ऊर्जा मंत्री ने इसके फायदों पर भी रोशनी डाली। उन्होंने बताया कि कई क्षेत्रों में उपभोक्ता सालों तक बिजली के बिल का भुगतान नहीं करते हैं, जिससे बिजली कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।

  • बिल की पेंडेंसी खत्म करना: प्रीपेड व्यवस्था में बिजली तभी मिलेगी जब आप रिचार्ज करेंगे। इससे भविष्य में बिलों के लंबित (Pending) रहने की समस्या खत्म हो जाएगी।
  • पारदर्शिता: उपभोक्ता अपनी खपत और खर्च को रीयल-टाइम में ट्रैक कर सकेंगे।

​निष्कर्ष

​सरकार के इस बयान से उन करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है जो स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली या इसके खर्च को लेकर डरे हुए थे। अब यह पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा कि वह पारंपरिक पोस्टपेड मीटर रखना चाहता है या आधुनिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर की ओर जाना चाहता है।