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शिक्षामित्रों का 'समान कार्य, समान वेतन' अधिकार, खैरात नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का सरकार को दो टूक निर्देश

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश के प्राथमिक शिक्षा ढांचे की रीढ़ माने जाने वाले शिक्षामित्रों के लिए न्याय की एक नई किरण दिखाई दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह शिक्षामित्रों के मानदेय और अधिकारों से जुड़े "समान कार्य, समान वेतन" के मुद्दे पर दो माह के भीतर निर्णायक कदम उठाए।

Shikshamitra Allahabad High Court News

न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की कड़ी टिप्पणी

​सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षामित्र लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में नियमित शिक्षकों के समान ही जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। कोर्ट ने कहा:

​​शिक्षामित्रों के 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के अधिकार को लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। राज्य सरकार को इस विषय की संवेदनशीलता को समझते हुए एक समयबद्ध निर्णय लेना होगा।
— High Court

2017 का हवाला और सरकार की इच्छाशक्ति

​शिक्षामित्रों के बीच यह चर्चा आम है कि यदि सरकार चाहे, तो यह मामला कुछ ही दिनों में सुलझ सकता है। सोशल मीडिया और शिक्षामित्र संगठनों का तर्क है कि:

  • तत्काल क्रियान्वयन: जिस प्रकार 25 जुलाई 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश (समायोजन निरस्तीकरण) को सरकार ने तत्काल प्रभाव से लागू किया था, ठीक उसी सक्रियता के साथ इस हाईकोर्ट के निर्देश को भी लागू किया जाना चाहिए।
  • सब कुछ सरकार के हाथ में: शिक्षामित्रों का मानना है कि बजट और नीतिगत निर्णय लेने की शक्ति पूरी तरह शासन के पास है। कोर्ट का यह निर्देश सरकार को एक सुधारात्मक कदम उठाने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है।

संगठनों के लिए आगे की राह

​आर्टिकल में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि अब गेंद सरकार और शिक्षामित्र संगठनों के पाले में है।

  1. संवाद की आवश्यकता: शिक्षामित्र संगठनों को चाहिए कि वे सरकार के उच्च प्रतिनिधियों (मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री) के साथ प्रभावी संवाद स्थापित करें।
  2. पूर्ण न्याय की मांग: केवल मानदेय में मामूली वृद्धि के बजाय, "समान कार्य-समान वेतन" के संवैधानिक सिद्धांत के आधार पर पूर्ण न्याय की मांग की जा रही है।

निष्कर्ष: क्या खत्म होगा वनवास?

​पिछले कई वर्षों से आर्थिक तंगी और अनिश्चितता का सामना कर रहे शिक्षामित्रों के लिए अगले दो महीने अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं। यदि सरकार हाईकोर्ट की मंशा के अनुरूप सकारात्मक निर्णय लेती है, तो न केवल शिक्षामित्रों का सम्मान बहाल होगा, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में भी एक नई ऊर्जा का संचार होगा।

प्रस्तुति: सर जी की पाठशाला (Sir Ji Ki Pathshala)