भारत में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर अनेक योजनाएँ चलाई जाती रही हैं, जिनका उद्देश्य हर बच्चे तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करना है। इन्हीं प्रयासों में एक महत्वपूर्ण पहल स्कूल चलो अभियान है, जो बच्चों को विद्यालय से जोड़ने और शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए संचालित किया जाता है। वर्ष 2026 में यह अभियान और अधिक प्रभावी रूप में लागू किया जा रहा है, जिससे अधिक से अधिक बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाया जा सके।
अभियान का उद्देश्य
स्कूल चलो अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल नामांकन बढ़ाना नहीं, बल्कि बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय आने के लिए प्रेरित करना भी है। इसके अंतर्गत विशेष रूप से उन बच्चों पर ध्यान दिया जाता है जो किसी कारणवश पढ़ाई से दूर हो गए हैं। साथ ही बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देना, अभिभावकों को जागरूक करना तथा दिव्यांग बच्चों को भी समान अवसर प्रदान करना इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
संचालन और समय-सीमा
वर्ष 2026 में यह अभियान दो चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पहला चरण 01 अप्रैल से 15 अप्रैल तक तथा दूसरा चरण 01 जुलाई से 15 जुलाई तक चलता है। इन दोनों चरणों के दौरान विद्यालयों में विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं, जिनका उद्देश्य बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के प्रति प्रेरित करना होता है।
विद्यालय स्तर पर गतिविधियाँ
अभियान के दौरान विद्यालयों में रैली, प्रभात फेरी, पोस्टर और बैनर के माध्यम से प्रचार-प्रसार किया जाता है। इसके साथ ही अभिभावक बैठकों का आयोजन कर उन्हें बच्चों की शिक्षा के महत्व के बारे में बताया जाता है। शिक्षक घर-घर जाकर ऐसे बच्चों की पहचान करते हैं जो विद्यालय नहीं जा रहे हैं और उनका नामांकन सुनिश्चित करते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी बच्चों और समाज को जोड़ने का प्रयास किया जाता है।
वित्तीय प्रावधान
इस अभियान के संचालन के लिए सरकार द्वारा प्रत्येक विद्यालय को लगभग ₹2500 की धनराशि प्रदान की जाती है। इस राशि का उपयोग रैली आयोजन, प्रचार सामग्री, बच्चों के लिए नाश्ता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में किया जाता है। यह धनराशि विद्यालय प्रबंधन समिति के माध्यम से पारदर्शी रूप से खर्च की जाती है।

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