लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में साक्षरता दर को बढ़ाने और शिक्षा की नींव को मजबूत करने के लिए एक बार फिर 'स्कूल चलो अभियान' को नई रफ्तार देने जा रही है। आगामी 1 मई से इस अभियान को पूरे प्रदेश में 'मिशन मोड' पर शुरू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी बच्चा स्कूल की दहलीज से दूर न रहे।
इन क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस
इस बार अभियान का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों को चिन्हित करना है, जो किन्हीं कारणों से शिक्षा से वंचित रह गए हैं या जिन्होंने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी है। सरकार ने विशेष रूप से इन क्षेत्रों में सर्वे के निर्देश दिए हैं:
- श्रमिक बस्तियां और झुग्गी-झोपड़ियां।
- ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले परिवारों के बच्चे।
- सुदूर ग्रामीण इलाके जहाँ ड्रॉपआउट दर अधिक है।
बेटियों और दिव्यांगों के लिए विशेष प्रबंध
अभियान में लैंगिक समानता और समावेशी शिक्षा पर भी जोर दिया गया है।
- बालिका शिक्षा: स्कूल छोड़ चुकी छात्राओं (ड्रॉपआउट) को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में प्राथमिकता के साथ दाखिला दिलाया जाएगा।
- दिव्यांग बच्चे: विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के लिए विशेष शिक्षकों (Special Educators) की मदद ली जाएगी ताकि उनका नामांकन सुचारू रूप से हो सके।
जन आंदोलन बनाने की अपील
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इस अभियान को केवल सरकारी प्रक्रिया न मानकर एक 'जन आंदोलन' का रूप दिया जाए। मुख्य सचिव की ओर से सभी जिलाधिकारियों (DMs) को आदेश जारी कर दिए गए हैं कि वे व्यक्तिगत रूप से इस अभियान की प्रगति की निगरानी करें।
निजी स्कूलों और बुनियादी सुविधाओं पर नजर
केवल सरकारी स्कूल ही नहीं, बल्कि शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत निजी स्कूलों में भी आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, स्कूलों में पेयजल, शौचालय और बैठने जैसी बुनियादी सुविधाओं को 'ऑपरेशन कायाकल्प' के माध्यम से और बेहतर बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष: सरकार का स्पष्ट संदेश है कि शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है। 1 मई से शुरू होने वाला यह मिशन उत्तर प्रदेश के शैक्षिक भविष्य को नई दिशा देने की एक बड़ी कोशिश है।

