लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय द्वारा प्रदेश के कई जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) को निर्देश जारी किए गए हैं कि वे जर्जर भवनों के ध्वस्तीकरण के बाद हुए नए निर्माण के भुगतान हेतु आवश्यक दस्तावेज तुरंत उपलब्ध कराएं।
किन जिलों के लिए है निर्देश?
यह आदेश मुख्य रूप से आगरा, अमेठी, बागपत, बस्ती, इटावा, जौनपुर, कानपुर देहात, कासगंज, लखीमपुर-खीरी, लखनऊ, महोबा और मुजफ्फरनगर जैसे जनपदों के लिए जारी किया गया है।
भुगतान के लिए अनिवार्य शर्तें और दस्तावेज
शासन ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों के लिए अवशेष धनराशि (बचे हुए बजट) का भुगतान तभी किया जाएगा, जब संबंधित विभाग निम्नलिखित दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे:
- जिलाधिकारी का अनुमोदन: पुनर्निर्माण हेतु कार्यदायी संस्था को नामित करने के लिए जिलाधिकारी द्वारा दिए गए अनुमोदन की प्रति।
- सत्यापन और हैंडओवर: तकनीकी समिति द्वारा विद्यालय के निरीक्षण के बाद उसे हैंडओवर किए जाने की रिपोर्ट और इस आशय का प्रमाणपत्र कि कार्य अनुबंध की शर्तों के अनुसार पूरा हुआ है।
- लागत विवरण: विद्यालयवार स्वीकृत निविदा (Tender) लागत और टी.एस. (Technical Sanction) की प्रति।
- प्रस्तावित प्रारूप: एक निर्धारित तालिका में विद्यालय का नाम, भवन का प्रकार (PS/UPS), स्वीकृत लागत और अब तक किए गए भुगतान का पूरा विवरण देना होगा।
15 दिनों की समय सीमा
अपर परियोजना निदेशक राजेन्द्र प्रसाद द्वारा हस्ताक्षरित इस पत्र में कड़ा निर्देश दिया गया है कि संबंधित सभी अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां 15 दिनों के भीतर डाक के माध्यम से राज्य परियोजना कार्यालय को उपलब्ध कराई जाएं।
लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी
शासन ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि समय पर सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई या भुगतान की प्रक्रिया में देरी हुई, तो इसके लिए जिला समन्वयक (निर्माण), प्रभारी वित्त एवं लेखाधिकारी और स्वयं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।







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