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निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम, जिलाधिकारी ने जारी किए सख्त निर्देश

Sir Ji Ki Pathshala

सीतापुर। जिला प्रशासन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी स्कूलों द्वारा वसूली जाने वाली फीस और अन्य शुल्कों को लेकर सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं। जिलाधिकारी द्वारा जारी किए गए कार्यालय ज्ञाप के अनुसार, अब कोई भी विद्यालय अपनी मनमर्जी से न तो फीस बढ़ा सकेगा और न ही अभिभावकों पर विशेष दुकानों से सामान खरीदने का दबाव बना सकेगा।

1. अनिवार्य शुल्क और पारदर्शिता

​आदेश के अनुसार, स्कूलों को अब सत्र शुरू होने से 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट और नोटिस बोर्ड पर फीस का पूरा विवरण सार्वजनिक करना होगा। अनिवार्य शुल्कों को चार श्रेणियों में बांटा गया है:

  • पंजीकरण शुल्क: केवल एक बार, नए प्रवेश के समय।
  • प्रवेश शुल्क (Admission Fee): केवल पहली बार प्रवेश लेते समय।
  • परीक्षा शुल्क: केवल परीक्षाओं के आयोजन के लिए।
  • संयुक्त वार्षिक शुल्क (Composite Annual Fee): यह साल में एक बार लिया जाने वाला आवर्ती शुल्क होगा।

2. 'नो डोनेशन' और खरीदारी की आजादी

​जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का 'डोनेशन' या 'कैपिटेशन फीस' लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा:

  • ​स्कूल किसी भी अभिभावक को विशेष दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
  • ​अगले 5 वर्षों तक स्कूल ड्रेस (यूनिफॉर्म) में बदलाव करने के लिए जिला शुल्क नियामक समिति (DFRC) की अनुमति अनिवार्य होगी।
  • ​परिवहन, हॉस्टल और मेस जैसे वैकल्पिक शुल्कों का भुगतान तभी करना होगा जब छात्र इन सुविधाओं का उपयोग करेगा।

3. फीस वृद्धि और किस्तों में भुगतान

​कोई भी स्कूल एक साथ पूरे साल की फीस जमा करने का दबाव नहीं बना सकता। अभिभावकों को मासिक, तिमाही या छमाही किस्तों में फीस जमा करने की सुविधा देना अनिवार्य है। साथ ही, बीच सत्र में किसी भी प्रकार की फीस वृद्धि अवैध मानी जाएगी।

4. सुरक्षा राशि (Caution Money) की वापसी

​छात्र के स्कूल छोड़ने के 30 दिनों के भीतर, स्कूल को उसकी सुरक्षा राशि (Security Deposit) ब्याज सहित वापस करनी होगी। यह राशि प्रवेश के समय लिए जाने वाले कुल वार्षिक शुल्क के 50% से अधिक नहीं हो सकती।

5. नियम तोड़ने पर भारी जुर्माना

​यदि कोई विद्यालय इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो अधिनियम के तहत कठोर दंड का प्रावधान है:

  • पहली बार उल्लंघन: ₹1,00,000 तक का जुर्माना और बढ़ी हुई फीस की वापसी।
  • दूसरी बार उल्लंघन: ₹5,00,000 तक का जुर्माना।
  • तीसरी बार उल्लंघन: विद्यालय की मान्यता रद्द करने की सिफारिश की जाएगी।

अभिभावक यहाँ करें शिकायत

​यदि कोई विद्यालय नियमों का पालन नहीं करता है, तो अभिभावक पहले स्कूल में शिकायत दर्ज करें। 15 दिनों के भीतर समाधान न मिलने पर, वे जिला शुल्क नियामक समिति (District Fee Regulatory Committee) में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Sitapur DM Office Order Copy School Fees