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करोड़ों का खेल किट घोटाला: विजिलेंस के रडार पर तत्कालीन BSA, शिक्षकों के बयानों ने बढ़ाई मुश्किलें

Sir Ji Ki Pathshala

झांसी: बेसिक शिक्षा विभाग में तीन साल पहले हुए बहुचर्चित 'खेल किट घोटाले' की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। बच्चों के शारीरिक विकास के लिए भेजी गई करोड़ों की धनराशि में हुए भ्रष्टाचार को लेकर विजिलेंस विभाग अब तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) वेदराम की भूमिका की गहनता से जांच कर रहा है। मामले में ताजा मोड़ तब आया जब विजिलेंस ने दर्जनों शिक्षकों के बयान दर्ज किए, जिनमें सीधे तौर पर उच्चाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

UP Basic Shiksha Khel Kit Ghotala

दबाव में हुई 'चहेती फर्म' से खरीद

​जांच में यह बात सामने आई है कि शासन द्वारा प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय को ₹5,000 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को ₹10,000 की ग्रांट दी गई थी। नियमतः यह खरीद विद्यालय स्तर पर होनी थी, लेकिन आरोप है कि तत्कालीन BSA ने खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) के माध्यम से प्रधानाध्यापकों पर मानसिक दबाव बनाया। शिक्षकों ने अपने बयानों में पुष्टि की है कि उन्हें एक विशेष 'चहेती फर्म' से ही घटिया गुणवत्ता वाली सामग्री खरीदने के लिए मजबूर किया गया था।

घटिया क्वालिटी और ठप पड़ा खेल का मैदान

​शिक्षकों का कहना है कि जो खेल किट प्रदान की गई, उसकी गुणवत्ता इतनी खराब थी कि वह चंद दिनों में ही टूटने लगी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद स्कूलों में बच्चे उन किटों का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। प्रेरणा पोर्टल पर सामग्री अपलोड करने की जल्दबाजी में नियमों को ताक पर रखकर यह पूरा बंदरबांट किया गया।

कैसे शुरू हुई कार्रवाई?

​इस पूरे खेल का पर्दाफाश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जितेंद्र दीक्षित की शिकायत के बाद हुआ। उन्होंने साक्ष्यों के साथ विजिलेंस में भ्रष्टाचार की गुहार लगाई थी। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद एसपी विजिलेंस राजेंद्र यादव की टीम इस मामले की कड़ियों को जोड़ रही है।

"अभी आरोपों की गहनता से जांच चल रही है। कई शिक्षकों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और संबंधित फर्मों व अधिकारियों के दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है। जल्द ही दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।"राजेंद्र यादव, एसपी विजिलेंस

शिक्षा विभाग में हड़कंप

​विजिलेंस की इस सक्रियता से शिक्षा विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच की आंच केवल तत्कालीन BSA तक ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसमें शामिल उन खंड शिक्षा अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है जिन्होंने बिचौलियों की भूमिका निभाई थी। अब देखना यह है कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले इन सफेदपोशों पर कानून का शिकंजा कब कसता है।