लखनऊ/हरदोई: उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर शासन ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। ताज़ा मामला हरदोई जिले का है, जहाँ तैनात बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) डॉ. अजीत सिंह के खिलाफ शासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।
क्यों हुई कार्रवाई? (मुख्य आरोप)
डॉ. अजीत सिंह पर लंबे समय से शासन की प्राथमिकताओं को नजरअंदाज करने और विभागीय कार्यों में मनमानी करने के आरोप लग रहे थे। शासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, उन पर निम्नलिखित गंभीर अनियमितताओं के आरोप हैं:
- ई-ऑफिस पोर्टल की अनदेखी: डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने वाले ई-ऑफिस पोर्टल पर फाइलों को लंबित रखना।
- साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा: साक्षरता मिशन और वैकल्पिक शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में अत्यधिक विलंब और शिथिलता।
- नियमों के विरुद्ध तैनाती: बिना सक्षम अधिकारी की अनुमति के ARP (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) की तैनाती करना, जो सीधे तौर पर नियमों का उल्लंघन है।
- योजनाओं में सुस्ती: केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही और स्वेच्छाचारिता।
नियमावली-1999 के तहत होगी जांच
शासन ने इन आरोपों को बेहद गंभीरता से लिया है। डॉ. अजीत सिंह के विरुद्ध उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के नियम-7 के तहत औपचारिक जांच शुरू कर दी गई है। यह नियम गंभीर कदाचार के मामलों में दंडात्मक कार्रवाई हेतु जांच का प्रावधान करता है।
जेडी लखनऊ को सौंपी गई कमान
इस हाई-प्रोफाइल मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए शासन ने लखनऊ मंडल के संयुक्त शिक्षा निदेशक (Joint Director) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। संयुक्त शिक्षा निदेशक को मामले के सभी पहलुओं की गहनता से जांच कर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जल्द से जल्द शासन को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल इस मामले में डॉ. अजीत सिंह की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन विभागीय गलियारों में इस बड़ी कार्रवाई के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।


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