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राष्ट्र सेवा में समर्पित शिक्षकों के लिए ₹1 करोड़ के बीमा कवच की न्यायोचित मांग

Sir Ji Ki Pathshala

देश की उन्नति और भविष्य की योजनाओं का आधार सटीक आंकड़ों पर टिका होता है। इन आंकड़ों को एकत्रित करने का महती कार्य जब भी शुरू होता है, राष्ट्र के शिक्षक और कर्मचारी अपनी पूरी निष्ठा के साथ इस जिम्मेदारी को कंधे पर उठा लेते हैं। जनगणना कोई सामान्य प्रशासनिक कार्य नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और श्रमसाध्य यज्ञ है। वर्तमान में, आगामी जनगणना कार्यों की सुगबुगाहट के बीच देश का समस्त शिक्षक समुदाय और कर्मचारी संगठन एक स्वर में सरकार के समक्ष अपनी सुरक्षा की मांग रख रहे हैं। यह मांग है—जनगणना ड्यूटी में तैनात प्रत्येक कर्मचारी के लिए कम से कम ₹1 करोड़ का अनिवार्य बीमा कवच।

Teachers demand for one crore insurance duty for Census of India as Security

​अक्सर देखा गया है कि राष्ट्रीय कर्तव्यों के दौरान कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर केवल औपचारिकताएं निभाई जाती हैं। चुनाव ड्यूटी जैसे कार्यों में भी यदि कोई अनहोनी होती है, तो मुआवजे की राशि इतनी कम होती है कि उससे एक परिवार का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता। जनगणना का कार्य तो चुनाव से भी अधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यह महीनों तक चलता है। इसमें कर्मचारियों को भीषण गर्मी, प्रतिकूल मौसम और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों में जाकर हर एक घर की दहलीज लांघनी पड़ती है। ऐसे में यह प्रश्न अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है कि जब जिम्मेदारी और जोखिम इतने बड़े हैं, तो सुरक्षा के मानक इतने सीमित क्यों हैं।

​फील्ड ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को अनेक प्रकार के अदृश्य खतरों का सामना करना पड़ता है। तपती धूप में लगातार पैदल चलने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव, सड़क दुर्घटनाओं की आशंका और कई बार संकीर्ण या संवेदनशील क्षेत्रों में काम करते समय होने वाले विवाद कर्मचारी की जान पर भारी पड़ सकते हैं। एक शिक्षक न केवल समाज का मार्गदर्शक है, बल्कि वह अपने परिवार का एकमात्र वित्तीय आधार भी होता है। यदि कर्तव्य पथ पर चलते हुए किसी कर्मचारी के साथ कोई दुखद घटना घटती है, तो उसका पूरा परिवार आर्थिक और सामाजिक रूप से बिखर जाता है। वर्तमान महंगाई के दौर में मिलने वाली नाममात्र की अनुग्रह राशि किसी भी दृष्टि से पर्याप्त नहीं कही जा सकती।

​इसलिए, समस्त शिक्षक समुदाय और कर्मचारी संगठनों का यह स्पष्ट मत है कि सरकार को जनगणना ड्यूटी को 'उच्च जोखिम' वाले कार्यों की श्रेणी में रखना चाहिए। ₹1 करोड़ की बीमा राशि कोई विलासिता नहीं, बल्कि उस कर्मचारी के प्रति राष्ट्र का सम्मान और उसके परिवार के प्रति जिम्मेदारी का प्रतीक है। इसके साथ ही, कर्मचारियों को ड्यूटी के दौरान त्वरित और कैशलेस चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में उनके जीवन की रक्षा प्राथमिकता के आधार पर की जा सके। प्रशासन को यह समझना होगा कि एक निश्चिंत कर्मचारी ही पूरी ऊर्जा और ईमानदारी के साथ अपना श्रेष्ठ योगदान दे सकता है।

​अंत में, यह सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है कि वह राष्ट्र सेवा करने वालों को उचित संरक्षण प्रदान करे। जो शिक्षक देश के हर नागरिक की गणना कर रहा है, उसकी अपनी सुरक्षा और उसके परिवार की खुशहाली की जिम्मेदारी भी इसी देश की है। शिक्षक समाज इस अपील के माध्यम से शासन का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकर्षित करना चाहता है और उम्मीद करता है कि जनगणना के आदेशों के साथ ही कर्मचारियों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की घोषणा भी की जाएगी। जब राष्ट्र का निर्माता सुरक्षित होगा, तभी राष्ट्र का भविष्य सुरक्षित होगा।

समस्त शिक्षक एवं कर्मचारी वर्ग की ओर से जारी