प्रयागराज: भारत की आगामी डिजिटल जनगणना को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। गुरुवार को प्रयागराज के एनआइसी (NIC) भवन में जिला स्तरीय जनगणना समन्वय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने आम जनता के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
डीएम ने स्पष्ट किया कि जनगणना के नाम पर किसी भी अनधिकृत व्यक्ति से अपनी व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें और न ही किसी को जनगणना रिकॉर्ड देखने की अनुमति दें।
डिजिटल माध्यम से होगा आंकड़ों का संग्रहण
इस बार की जनगणना पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल होगी। प्रगणकों (Enumerators) द्वारा विशिष्ट मोबाइल एप्लीकेशन का प्रयोग किया जाएगा।
- प्रथम चरण: इसमें मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संपत्तियों से संबंधित आंकड़े एकत्र किए जाएंगे।
- स्वगणना (Self-Enumeration): पहली बार आम जनता को 'स्वगणना' का विकल्प दिया गया है। लोग आधिकारिक पोर्टल पर जाकर स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन भर सकते हैं।
33 सवालों के देने होंगे सही जवाब, वरना लगेगा जुर्माना
जनगणना के पहले चरण में प्रगणकों द्वारा कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे। सरकार ने चेतावनी दी है कि यदि कोई नागरिक गलत जानकारी देता है या सहयोग नहीं करता, तो जनगणना अधिनियम 1948 के तहत उस पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
इन बातों की देनी होगी सटीक जानकारी:
- यदि आपके पास एक से अधिक वाहन (जैसे दो कार) हैं, तो उसकी सही संख्या बतानी होगी।
- परिवार में प्रयोग होने वाले सभी मोबाइल नंबरों का विवरण।
- गांव और शहर में मौजूद मकान या फ्लैट (चाहे वह स्वयं के नाम हो या पत्नी के नाम) की सही जानकारी देना अनिवार्य है।
स्वगणना के बाद मिलेगी 16 अंकों की आईडी
जो लोग खुद ऑनलाइन जानकारी भरेंगे (Self-Enumeration), उन्हें पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद 16 अंकों की एक विशिष्ट आईडी प्राप्त होगी। जब सरकारी प्रगणक सत्यापन के लिए आपके घर आएंगे, तो उन्हें यह आईडी दिखाना जरूरी होगा। इससे प्रगणक को दोबारा डेटा भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी और समय की बचत होगी।
सुरक्षा के लिए डीएम के कड़े निर्देश
जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि केवल आधिकारिक रूप से नियुक्त व्यक्ति (प्रगणक/पर्यवेक्षक) ही आपसे जानकारी मांग सकता है। डेटा की गोपनीयता बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपने दस्तावेज या जनगणना रिकॉर्ड न दिखाएं।


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