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संविधान पीठ की व्यस्तता के चलते 69,000 शिक्षक भर्ती की सुनवाई टली, अगले सप्ताह सप्लीमेंट्री लिस्ट पर टिकी निगाहें

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर होने वाली अहम सुनवाई टल गई है। वर्तमान में आरक्षण विवाद और मेरिट लिस्ट को लेकर चल रही कानूनी जंग के निर्णायक मोड़ पर पहुँचने की उम्मीद थी, लेकिन तकनीकी कारणों से अभ्यर्थियों को अभी थोड़ा और इंतज़ार करना होगा।

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​⚖️ सुनवाई टलने की मुख्य वजह

​सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को बेंगलुरु वाटर सप्लाई से जुड़े एक ऐतिहासिक और पुराने औद्योगिक विवाद की सुनवाई के लिए नौ जजों की संविधान पीठ का गठन किया गया था। शिक्षक भर्ती मामले की सुनवाई कर रही पीठ के सदस्य भी इस विशेष संविधान पीठ में शामिल थे। इसी व्यस्तता के कारण दैनिक कार्यसूची में होने के बावजूद शिक्षक भर्ती मामले को टेक-अप नहीं किया जा सका।

​🔍 मामले के प्रमुख बिंदु और 'याची लाभ' की मांग

​यह भर्ती प्रक्रिया पिछले कई वर्षों से विवादों के घेरे में है। वर्तमान में अभ्यर्थियों का ध्यान मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर केंद्रित है:

  • सब्जेक्ट टू फाइनल ऑर्डर: कोर्ट ने 7 दिसंबर 2020 को ही स्पष्ट कर दिया था कि यह पूरी भर्ती प्रक्रिया अंतिम न्यायिक निर्णय के अधीन होगी।
  • आरक्षण का पेंच: आरक्षित और सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों के बीच चयन सूची और आरक्षण विसंगति को लेकर लंबी कानूनी लड़ाई चल रही है।
  • याची लाभ की उम्मीद: दिसंबर 2020 की 13 याचिकाओं से जुड़े अभ्यर्थियों ने मांग की है कि उन्हें 'याची लाभ' (Petitioner Benefit) दिया जाए।
  • शासन की सक्रियता: लोक भवन ने इस मामले पर गंभीरता दिखाई है। अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बेसिक शिक्षा सचिव को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिससे अभ्यर्थियों में सकारात्मक निर्णय की उम्मीद जगी है।

​📋 आगे का संभावित घटनाक्रम

​हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक कोई आधिकारिक तिथि (Next Date) साझा नहीं की है, लेकिन विधिक जानकारों और अभ्यर्थियों का मानना है कि:

  1. ​मामला अगले सप्ताह सप्लीमेंट्री लिस्ट (Supplementary List) में सूचीबद्ध हो सकता है।
  2. ​पूरी चयन सूची (Selection List) में बदलाव की संभावनाओं को देखते हुए शासन और अभ्यर्थी दोनों ही सुप्रीम कोर्ट के रुख पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।
निष्कर्ष: प्रदेश के हजारों परिवारों का भविष्य इस अंतिम फैसले पर टिका है। यदि कोर्ट चयन सूची को पुनरीक्षित करने का आदेश देता है, तो वर्तमान में कार्यरत और बाहर बैठे अभ्यर्थियों के समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।

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