उत्तर प्रदेश की राजनीति और शासन व्यवस्था में 'अंत्योदय' (अंतिम व्यक्ति का उदय) के संकल्प को चरितार्थ करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक ने राज्य के भविष्य की एक नई इबारत लिख दी है। यह बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसमें लिए गए निर्णय राज्य के ग्रामीण बुनियादी ढांचे, डिजिटल गवर्नेंस, कर्मचारी कल्याण और शहरी आवास की दिशा में दूरगामी परिणाम लाने वाले हैं।
प्रदेश सरकार का मुख्य ध्यान इस समय "ईज ऑफ लिविंग" यानी आम जनमानस के जीवन को सरल और सुगम बनाने पर है। एक ओर जहाँ 'मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना' के माध्यम से उन सुदूर गांवों तक पहुँचने की कोशिश की गई है जो आजादी के सात दशकों बाद भी परिवहन की मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहीं दूसरी ओर 'ओला-उबर' जैसे डिजिटल प्लेटफार्मों को नियमबद्ध कर यात्रियों की सुरक्षा का एक नया सुरक्षा कवच तैयार किया गया है। शिक्षा जगत में वर्षों से लंबित अशासकीय शिक्षकों की कैशलेस इलाज की मांग को पूरा करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है।
कुल 31 प्रस्तावों में से 30 को दी गई यह मंजूरी साफ संकेत देती है कि उत्तर प्रदेश अब केवल बड़े शहरों के विकास तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि वह अपनी 59 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों को सीधे तौर पर आर्थिक और सामाजिक प्रगति से जोड़ना चाहता है। भ्रष्टाचार पर प्रहार और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से संपत्ति पंजीकरण और कर्मचारी आचरण नियमावली में किए गए बदलाव, इस बैठक के सबसे साहसिक निर्णयों में से एक कहे जा सकते हैं।
1. मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना-2026: 'अंतिम छोर तक सफर'
सरकार ने प्रदेश की सभी 59,163 ग्राम सभाओं को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।
- प्रमुख बिंदु: प्रदेश के उन 12,200 गांवों में पहली बार बसें पहुंचेंगी जहाँ आजादी के बाद से अब तक सरकारी परिवहन का अभाव था।
- छोटी बसें, बड़ी सुविधा: संकरी सड़कों को देखते हुए 28 सीटर (अधिकतम 7 मीटर लंबी) बसें चलाई जाएंगी।
- टैक्स और परमिट फ्री: इन बसों को रोड टैक्स और परमिट शुल्क से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। निजी ऑपरेटरों को 10 साल के अनुबंध पर बसें चलाने की अनुमति मिलेगी।
- समय सारिणी: ये बसें रात में गांवों में रुकेंगी और सुबह 10 बजे तक तहसील या जिला मुख्यालय पहुंचेंगी, जिससे छात्र और छोटे व्यापारी लाभान्वित होंगे।
2. शिक्षकों और कर्मचारियों को 'कैशलेस चिकित्सा' की सौगात
प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लगभग 1.28 लाख शिक्षकों के लिए यह एक बड़ी राहत है।
- नया नियम: अब इन शिक्षकों को इलाज के लिए बिलों की प्रतिपूर्ति (Reimbursement) के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
- प्रीमियम: सरकार प्रति शिक्षक औसतन 2,479 रुपये का वार्षिक प्रीमियम वहन करेगी। इसके लिए राज्य सरकार पर ₹31.92 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
3. ओला-उबर (Aggregators) के लिए सख्त नियमावली
यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'उत्तर प्रदेश एग्रीगेटर नीति' को मंजूरी दी गई है।
- अनिवार्य पंजीकरण: ओला, उबर जैसे प्लेटफॉर्म्स को अब यूपी में लाइसेंस लेना होगा। लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये और आवेदन शुल्क 25 हजार रुपये तय किया गया है।
- कड़े सुरक्षा मानक: ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन, मेडिकल टेस्ट और फिटनेस जांच अनिवार्य होगी। सरकार अपना खुद का 'परिवहन ऐप' भी विकसित करेगी।
4. संपत्ति रजिस्ट्री में पारदर्शिता: 'खतौनी मिलान' अनिवार्य
जमीन की खरीद-बिक्री में होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार ने कड़ा कदम उठाया है।
- अब किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री से पहले विक्रेता के नाम का मिलान राजस्व रिकॉर्ड (खतौनी) से किया जाएगा।
- यदि नाम में कोई अंतर पाया जाता है, तो पंजीकरण विभाग इसकी गहन जांच करेगा।
5. प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) का विस्तार
बढ़ती निर्माण लागत को देखते हुए गरीबों के घर के बजट और आकार में बढ़ोतरी की गई है।
- लागत और आकार: आवास की लागत सीमा 6 लाख से बढ़ाकर 9 लाख रुपये और क्षेत्रफल 22 वर्गमीटर से बढ़ाकर 30 वर्गमीटर कर दिया गया है।
- दलित परिवारों को आवास: 'कांशीराम आवास योजना' के रिक्त पड़े मकानों की मरम्मत कराकर उन्हें पात्र दलित परिवारों को आवंटित करने का निर्णय लिया गया है।
6. सरकारी कर्मचारियों के लिए सख्त आचरण नियम
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत सेवा नियमावली में संशोधन किया गया है:
- निवेश की सूचना: यदि कोई कर्मचारी अपने 6 माह के मूल वेतन से अधिक का निवेश (शेयर, म्यूचुअल फंड आदि) करता है, तो उसे सरकार को सूचित करना होगा।
- संपत्ति का ब्यौरा: प्रत्येक कर्मचारी को प्रतिवर्ष अपनी चल-अचल संपत्ति की घोषणा अनिवार्य रूप से करनी होगी।
7. क्षेत्रीय विकास की अन्य प्रमुख मंजूरियां
- अयोध्या: खेल परिसर के लिए 2500 वर्गमीटर भूमि नगर निगम को हस्तांतरित की जाएगी।
- कानपुर: ट्रांस गंगा सिटी को जोड़ने के लिए फोर-लेन पुल के निर्माण को हरी झंडी।
- डेयरी विकास: बुंदेलखंड के बांदा और झांसी में डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी।


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