Type Here to Get Search Results !
UPDATES
🔴 ब्रेकिंग: UPTET 2026: कार्यरत शिक्षकों को मिलेगा विशेष अवकाश Breaking 🔴 ब्रेकिंग: UPTET 2026: एडमिट कार्ड जारी, यहाँ से करें डाउनलोड Breaking 🔴 ब्रेकिंग: UP TGT Result 2026: रिजल्ट घोषित, 9 जुलाई से डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन Breaking 🔴 ब्रेकिंग: यूपी होमगार्ड भर्ती परीक्षा 2025 का रिजल्ट जारी, जनपदवार CutOff देखें Breaking 🔴 ब्रेकिंग: भीषण गर्मी के चलते UP के इन जिलों के स्कूलों का समय बदला, देखें नई लिस्ट Breaking 🔴 iGOT पोर्टल: सभी उपलब्ध कोर्स लिंक New 🔴 प्रेरणा पोर्टल: छात्र व अभिभावक आधार वेरिफिकेशन प्रक्रिया 🔴 शिक्षक कैशलेस योजना: आवेदन, स्टेटस और EKYC अपडेट New 🔴 UP कैशलेस हॉस्पिटल लिस्ट 2026: अपने जिले का अस्पताल देखें New 🔴 UP B.Ed काउंसलिंग: 1 जुलाई से शुरू, देखें पूरा शेड्यूल Hot 🔴 ✍️ SMC बैठक रजिस्टर जुलाई 2026: एजेंडा और कार्यवाही देखें New 🔴 🌳 ईको क्लब जुलाई 2026: मुख्य गतिविधियाँ एवं कार्य-योजना New
ADVERTISEMENT

TET अनिवार्यता निर्णय के खिलाफ 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में TFI द्वारा महाआंदोलन की तैयारी

Sir Ji Ki Pathshala

भारत के शिक्षा जगत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य करने के फैसले ने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है। Teacher Federation of India (TFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा जी के कुशल नेतृत्व में अब देश भर के लाखों शिक्षकों ने 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में अपनी आवाज बुलंद करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

Dr. Dinesh Chandra Sharma TFI Delhi TET Protest 4 April

​सुप्रीम कोर्ट के हालिया रुख के अनुसार, शिक्षण कार्य में लगे सभी अध्यापकों के लिए TET पास करना अनिवार्य कर दिया गया है। डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा जी और अन्य शिक्षक संगठनों का मुख्य विरोध इस बात पर है कि यह नियम उन वरिष्ठ शिक्षकों पर भी थोपा जा रहा है जो शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से सालों पहले नियुक्त हुए थे।

डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा जी का पक्ष: "अध्यापकों की नियुक्ति उस समय की अनिवार्य योग्यताओं और NCTE मानकों को पूरा करने के बाद ही हुई थी। दशकों की सेवा के बाद अब पुरानी नियुक्तियों पर परीक्षा की अनिवार्यता थोपना तर्कहीन और अन्यायपूर्ण है।"

उत्तर प्रदेश से शुरू हुई विरोध की लहर

​विरोध की सबसे मजबूत लहर उत्तर प्रदेश में देखी गई, जहाँ 16 सितंबर को डॉ. शर्मा जी के नेतृत्व में हुए विशाल प्रदर्शन ने राज्य सरकार को हिला दिया। इसी दबाव के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन भी दाखिल की है। अब यह आंदोलन केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि 20 से अधिक राज्यों के शिक्षक संगठन TFI के साझा मंच पर एकजुट हो गए हैं।

संसद और शिक्षा मंत्रालय तक पहुँचा मुद्दा

​शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडलों ने इस गंभीर विषय पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात की है। डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा जी के अनुसार, शिक्षा मंत्री ने अनौपचारिक रूप से शिक्षकों की चिंताओं को वाजिब माना है, लेकिन कानूनी रूप से अब तक कोई ठोस राहत (अध्यादेश या संशोधन) प्रदान नहीं की गई है। इसी 'अनिश्चितता' के कारण शिक्षकों में भारी रोष व्याप्त है।

प्रमुख मांगें और चुनौतियां:

  • संवैधानिक सुरक्षा: पुराने शिक्षकों के सेवा अनुभव और पूर्व में की गई नियुक्तियों को सुरक्षित माना जाए।
  • RTE में संशोधन: नियमावली में सुधार कर पुराने शिक्षकों को TET से स्थायी छूट दी जाए।
  • न्यायिक स्पष्टता: बार-बार टल रही अदालती सुनवाई के कारण शिक्षकों के वेतन और पदों पर मंडरा रहा खतरा तुरंत खत्म हो।

रणनीति: 4 अप्रैल को रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन

​TFI के राष्ट्रीय अध्यक्ष का स्पष्ट मानना है कि अब बातचीत का समय समाप्त हो चुका है। इसीलिए, 4 अप्रैल को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया गया है। इसका उद्देश्य सीधे भारत सरकार और संसद को यह संदेश देना है कि यदि 20-25 लाख शिक्षकों की मांगों पर गौर नहीं किया गया, तो देशव्यापी आंदोलन और तेज होगा।

वीडियो देखें

Top Post Ad

ADVERTISEMENT

Bottom Post Ad

ADVERTISEMENT