नई दिल्ली: टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ0 दिनेश चंद्र शर्मा ने शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त किए गए शिक्षकों पर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो शिक्षक अपनी नियुक्ति के समय निर्धारित सभी योग्यताओं को पूरा करते थे, उन पर अब नई शर्तें थोपना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
विभागीय परीक्षा की मांग पर उठाए सवाल
डॉ0 दिनेश चंद्र शर्मा ने उन संगठनों की कड़ी आलोचना की जो इस मुद्दे के समाधान के तौर पर 'विभागीय परीक्षा' की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
"जो संगठन इस प्रकरण में विभागीय परीक्षा की मांग कर रहे हैं, मुझे उनके शिक्षक संगठन होने पर ही संदेह है। नियुक्ति के समय जो योग्यता पर्याप्त थी, उसे अब चुनौती देना न्याय नहीं है।"
— डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष (TFI)संसद और जनप्रतिनिधियों से गुहार
डॉ0 दिनेश चंद्र शर्मा ने केंद्र सरकार और लोकसभा सदस्यों से इस संकटपूर्ण स्थिति में हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- संसद की सर्वोच्चता: लोकतंत्र में संसद ही देश और नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए कानून बनाती है।
- 25 लाख शिक्षकों का भविष्य: इस निर्णय से देश भर के लगभग 20-25 लाख शिक्षकों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।
- कानूनी संशोधन की आवश्यकता: भारत सरकार को संसद में कानून बनाकर RTE से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत देनी चाहिए।
दिल्ली कूच की चेतावनी
डॉ0 दिनेश चंद्र शर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि शिक्षकों को न्याय नहीं मिला, तो देश भर का शिक्षक एकजुट होकर दिल्ली की सड़कों पर उतरेगा। उन्होंने इस नियम को 'अंधा कानून' करार देते हुए संकल्प लिया कि वे शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।


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