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शिक्षामित्रों के नियमितीकरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, दो महीने में फैसला लेने का आदेश

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों के नियमितीकरण से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने इस मामले में राज्य सरकार को जल्द निर्णय लेने को कहा है। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने आदेश देते हुए कहा कि शिक्षा मित्रों के मुद्दे पर दो महीने के भीतर फैसला लिया जाए।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को इस विषय में आवश्यक निर्णय लेने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि लंबे समय से लंबित इस मुद्दे पर अब स्पष्ट निर्णय होना चाहिए ताकि प्रभावित अभ्यर्थियों को राहत मिल सके।

जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच का आदेश

इस मामले की सुनवाई जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने की। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शिक्षा मित्रों के नियमितीकरण के संबंध में सभी पहलुओं पर विचार करते हुए दो माह के भीतर निर्णय लिया जाए।

दरअसल, शिक्षा मित्रों की ओर से दाखिल की गई रिट याचिका (Writ-A No. 3236/2026) में तेज बहादुर मौर्य सहित 114 शिक्षा मित्रों ने नियमितीकरण और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग उठाई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षा मित्रों के लिए स्थायी पद सृजित कर उन्हें नियमित किया जाना चाहिए तथा उन्हें नियमित सहायक शिक्षक के समान वेतन और सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि शिक्षा मित्र वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ऐसे में उन्हें अस्थायी व्यवस्था में बनाए रखना न्यायसंगत नहीं है।

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि पूर्व में आए न्यायालय के फैसलों—विशेष रूप से आनंद कुमार यादव प्रकरण—के अनुसार शिक्षा मित्रों का सीधा नियमितीकरण कानूनी रूप से संभव नहीं है। सरकार का पक्ष था कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व निर्णयों के मद्देनजर इस दिशा में सीमाएं हैं।

हालांकि, सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि भविष्य में होने वाली शिक्षक भर्तियों में शिक्षा मित्रों को अवसर दिया जा सकता है। उनके लंबे अनुभव को ध्यान में रखते हुए उन्हें आयु सीमा में छूट या अतिरिक्त वेटेज देने जैसे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए अपर मुख्य सचिव सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षा मित्रों द्वारा दिए गए प्रत्यावेदन पर दो माह के भीतर विधिक रूप से निर्णय लिया जाए।

Allahabad High Court order on Shiksha Mitra regularization case

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