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पालना से पाठशाला: बच्चों के भविष्य को संवारने की नई पहल, 'कलर कोडिंग' से होगा आकलन

Sir Ji Ki Pathshala

वाराणसी जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों और परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए प्रशासन ने एक व्यापक योजना तैयार की है। 'पालना से पाठशाला' मुहिम के तहत अब बच्चों की केवल उपस्थिति ही नहीं, बल्कि उनकी सीखने की क्षमता का भी निरंतर आकलन किया जाएगा। इसके लिए शिक्षकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।

वाराणसी पालना से पाठशाला अभियान - बच्चों का आकलन।

​📊 तीन श्रेणियों में होगा बच्चों का वर्गीकरण

​इस नई व्यवस्था की सबसे खास बात बच्चों को उनकी सीखने की क्षमता के आधार पर तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटना है। यह 'कलर कोडिंग' शिक्षकों को यह समझने में मदद करेगी कि किस बच्चे पर कितनी मेहनत की जरूरत है:

  • ​🟢 ग्रीन श्रेणी: उन बच्चों के लिए जो पढ़ाई में तेज हैं और पाठ्यसामग्री को आसानी से समझ रहे हैं।
  • ​🟡 येलो श्रेणी: उन बच्चों के लिए जो औसत दर्जे के हैं और जिन्हें थोड़ा और प्रोत्साहन देने पर वे बेहतर कर सकते हैं।
  • ​🔴 रेड श्रेणी: उन बच्चों के लिए जो पढ़ाई में कमजोर हैं। इन बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा और हर तीन महीने में इनका पुन: आकलन किया जाएगा।

​👩‍🏫 शिक्षकों और आंगनबाड़ी केंद्रों की भूमिका

​इस मुहिम को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है:

  1. तैनाती: आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए 122 विशेष शिक्षकों की तैनाती की जा चुकी है, जबकि परिषदीय विद्यालयों (कक्षा 1 से 8) में वहां के वर्तमान शिक्षक ही यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
  2. दायरा: जिले के 3,914 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत लगभग 2.64 लाख बच्चों में से, प्रथम चरण में 3 से 6 वर्ष के 54,000 नौनिहालों का चयन किया गया है।
  3. लक्ष्य: रेड श्रेणी वाले बच्चों को निरंतर सुधार के माध्यम से मुख्यधारा की शिक्षा और स्कूलों में प्रवेश के लिए तैयार करना है।

​📅 कब से शुरू होगा अभियान?

​जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अनुराग श्रीवास्तव के अनुसार, इस आकलन की प्रक्रिया आगामी सत्र (अप्रैल) से पूरी तरह शुरू कर दी जाएगी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को 'निपुण' बनाना और बुनियादी शिक्षा की नींव को मजबूत करना है।

"यह पहल न केवल बच्चों के सीखने के स्तर को ट्रैक करेगी, बल्कि शिक्षकों को भी एक स्पष्ट रोडमैप देगी कि उन्हें किन बच्चों के साथ अतिरिक्त प्रयास करने की आवश्यकता है।"


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