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यूपी में राज्यकर्मियों के लिए नए नियम: अब शेयर बाजार में निवेश और संपत्ति पर रहेगी सरकार की कड़ी नजर

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार राज्य कर्मचारियों के लिए आचरण नियमावली में बड़े बदलाव करने जा रही है। मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में 'उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण (संशोधन) नियमावली 2026' को मंजूरी मिल सकती है। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना है।

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​यहाँ उन प्रमुख बदलावों का विवरण दिया गया है जो जल्द ही लागू हो सकते हैं:

​शेयर और निवेश की देनी होगी जानकारी

​नए नियमों के अनुसार, यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष के दौरान अपने 6 माह के मूल वेतन (Basic Pay) से अधिक राशि स्टॉक, शेयर, डिबेंचर या अन्य म्यूचुअल फंड निवेश में लगाता है, तो उसे अनिवार्य रूप से अपने विभागीय प्राधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी।

​चल संपत्ति की खरीद के लिए बदली सीमा

​अभी तक नियम यह था कि यदि कर्मचारी 1 माह के मूल वेतन से अधिक की कोई चल संपत्ति (जैसे वाहन, ज्वेलरी आदि) खरीदता है, तो उसे विभाग को बताना पड़ता था। अब इस सीमा को बढ़ाकर 6 माह का मूल वेतन करने का प्रस्ताव है। इससे छोटे निवेशों के लिए बार-बार जानकारी देने की औपचारिकता से राहत मिलेगी, लेकिन बड़े निवेशों पर निगरानी बढ़ जाएगी।

​अचल संपत्ति का ब्यौरा अब हर साल

​सबसे महत्वपूर्ण बदलाव अचल संपत्ति (मकान, जमीन आदि) की घोषणा को लेकर है।

  • वर्तमान नियम: कर्मचारियों को हर 5 वर्ष में अपनी अचल संपत्ति का विवरण देना होता था।
  • प्रस्तावित नियम: अब कर्मचारियों को हर वर्ष अपनी अचल संपत्तियों की घोषणा करनी होगी। यह प्रक्रिया नियुक्ति के समय से ही शुरू हो जाएगी।

​परिवार के सदस्यों का निवेश भी दायरे में

​कर्मचारियों को न केवल अपनी, बल्कि अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर खरीदी गई, दान में मिली या गिरवी रखी गई संपत्तियों और निवेशों का पूरा ब्यौरा भी सरकार को सौंपना होगा।

मुख्य उद्देश्य: इन संशोधनों के माध्यम से सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कर्मचारियों की आय के स्रोत और उनके खर्चों में संतुलन बना रहे और सार्वजनिक सेवा में शुचिता बनी रहे।



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