भोपाल: मध्य प्रदेश के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) ने एक महत्वपूर्ण सूचना जारी की है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में अब उन सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है जो सेवा में बने रहना चाहते हैं।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का आदेश?
सुप्रीम कोर्ट के सिविल अपील संख्या 1385/2025 और 1386/2025 में दिए गए फैसले के अनुसार, शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के तहत सभी शिक्षकों का पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक है। आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- 2 साल की समय सीमा: ऐसे शिक्षक जिन्होंने अब तक पात्रता परीक्षा पास नहीं की है, उन्हें आगामी दो वर्षों के भीतर इसे उत्तीर्ण करना होगा।
- अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement): यदि कोई शिक्षक निर्धारित समय सीमा में परीक्षा पास नहीं कर पाता है और उसकी सेवानिवृत्ति में 5 वर्ष से अधिक का समय शेष है, तो उन्हें अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा।
- पेंशन और लाभ: सेवानिवृत्ति की स्थिति में शिक्षकों को नियमानुसार टर्मिनल बेनिफिट्स (पेंशन आदि) दिए जाएंगे, बशर्ते उन्होंने अपनी सेवा की अर्हता अवधि पूरी की हो।
जुलाई-अगस्त 2026 में होगी परीक्षा
लोक शिक्षण संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक और माध्यमिक स्तर के सभी संवर्गों के शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा का आयोजन जुलाई और अगस्त 2026 में किया जाना संभावित है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के ऐसे सभी शिक्षकों को सूचित करें जिन्होंने अब तक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है।
किसे मिलेगी छूट?
आदेश के अनुसार, यह नियम उन शिक्षकों पर लागू नहीं होगा जिनकी सेवानिवृत्ति (Superannuation) में 5 वर्ष से कम का समय बचा है। इसके अलावा, प्रमोशन के इच्छुक शिक्षकों के लिए भी अब TET पास करना अनिवार्य होगा, अन्यथा उनके नाम पर विचार नहीं किया जाएगा।
निष्कर्ष: यह आदेश प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब देखना यह है कि हजारों की संख्या में कार्यरत शिक्षक इस समय सीमा के भीतर परीक्षा को सफलतापूर्वक पार कर पाते हैं या नहीं


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