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लापता शिक्षक का यमुना के टापू पर मिला शव, विभाग पर लगा मानसिक उत्पीड़न का आरोप

Sir Ji Ki Pathshala

मंझनपुर (कौशाम्बी): उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में पिछले पांच दिनों से लापता सहायक अध्यापक कृष्ण बाबू वर्मा का अंततः दुखद अंत हो गया। सोमवार को कौशाम्बी थाना क्षेत्र के अंतर्गत महिला पुल के नीचे यमुना नदी के बीचों-बीच बने एक टापू पर उनका शव बरामद किया गया। धरमपुर कनैली के निवासी 56 वर्षीय कृष्ण बाबू वर्मा की मौत की खबर मिलते ही उनके परिवार में कोहराम मच गया और स्थानीय शिक्षा जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को कब्जे में लिया और शुरुआती जांच के बाद इसे आत्महत्या का मामला बताया है, हालांकि मौत की असली वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

यमुना नदी के टापू पर मिला लापता शिक्षक कृष्ण बाबू वर्मा का शव

​घटनाक्रम की शुरुआत 25 फरवरी को हुई थी जब कृष्ण बाबू हमेशा की तरह घर से विद्यालय जाने के लिए निकले थे। सुबह करीब साढ़े नौ बजे उन्होंने अपनी बेटी मेघना को फोन कर सूचित किया कि वह बीएलओ कार्य से बाहर जा रहे हैं, लेकिन इसके ठीक बाद उनका मोबाइल फोन बंद हो गया। जब देर शाम तक वह घर नहीं लौटे और रिश्तेदारों के यहाँ भी उनका कोई पता नहीं चला, तो घबराए परिजनों ने सरायअकिल थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस और परिजन लगातार उनकी तलाश कर रहे थे, लेकिन पांचवें दिन उनका शव नदी के बीच मिला।

​इस दुखद घटना के पीछे मृतक की बेटी मेघना ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि कृष्ण बाबू पिछले कुछ समय से शारीरिक रूप से अस्वस्थ चल रहे थे, इसके बावजूद विभागीय दबाव के कारण उन्हें निरंतर ड्यूटी करनी पड़ रही थी। बेटी ने आरोप लगाया कि उनके पिता पर काम का बोझ इतना अधिक था कि वह गहरे मानसिक तनाव में रहने लगे थे। एक तरफ पारिवारिक जिम्मेदारियां और दूसरी तरफ विभागीय कार्यों का प्रेशर, इन दोनों के बीच वह खुद को असहाय महसूस कर रहे थे। परिवार का स्पष्ट मानना है कि इसी मानसिक प्रताड़ना ने उन्हें आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर किया।

​दूसरी ओर, प्रशासन ने परिवार द्वारा लगाए गए इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय कार्य नियमानुसार ही कराए जा रहे थे और दबाव जैसी कोई स्थिति नहीं थी। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि शिक्षक की मौत किन परिस्थितियों में हुई। इस घटना ने एक बार फिर सरकारी कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य और कार्य के बोझ पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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