Type Here to Get Search Results !

डिजिटल एप्स से स्मार्ट बनेंगे परिषदीय विद्यालयों के छात्र

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नए शैक्षिक सत्र के साथ ही शिक्षा के डिजिटलीकरण की एक नई लहर देखने को मिल रही है। सरकार और शिक्षा विभाग का मुख्य फोकस अब पारंपरिक चॉक-डस्टर वाली पढ़ाई के साथ-साथ आधुनिक डिजिटल टूल्स को जोड़ना है ताकि बच्चों के सीखने की क्षमता को वैश्विक स्तर पर लाया जा सके। इसके लिए दीक्षा एप, खान एकेडमी और द टीचर एप जैसे महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म्स को शिक्षण प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।

डिजिटल शिक्षा के माध्यम से पढ़ते परिषदीय विद्यालय के बच्चे

​इन डिजिटल माध्यमों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ छात्रों के लिए उनकी कक्षा के अनुसार वीडियो लेसन, इंटरैक्टिव क्विज और ई-पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। यह सामग्री न केवल रोचक है बल्कि बच्चों को गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों को अपनी गति से समझने की स्वतंत्रता भी देती है। जब छात्र विजुअल माध्यम से किसी कठिन सिद्धांत को देखते हैं, तो उनकी समझ अधिक गहरी और स्थायी हो जाती है।

​शिक्षण की गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए केवल छात्रों पर ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के प्रशिक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। द टीचर एप जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से शिक्षकों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कोर्स उपलब्ध कराए गए हैं जिससे उनका सतत क्षमता संवर्द्धन सुनिश्चित हो सके। इससे शिक्षक नई शिक्षण विधियों को सीखकर कक्षा के वातावरण को और अधिक प्रभावी और जीवंत बना सकेंगे।

​तकनीक के इस प्रयोग के साथ-साथ व्यक्तिगत निगरानी की व्यवस्था को भी कड़ा किया गया है। शिक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे नियमित रूप से छात्र-छात्राओं की कार्य पुस्तिकाओं की जांच करें। इस प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य यह है कि शिक्षकों द्वारा दिया गया रचनात्मक फीडबैक बच्चों की छोटी-बड़ी कमियों को समय पर पहचान सके और उनमें सुधार कर सके। डिजिटल लर्निंग और व्यक्तिगत मार्गदर्शन का यह अनूठा संगम निश्चित रूप से परिषदीय विद्यालयों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएगा।

Top Post Ad

Bottom Post Ad