उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदलने और बच्चों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए सरकार प्रतिवर्ष 'कंपोजिट स्कूल ग्रांट' (समग्र विद्यालय अनुदान) आवंटित करती है। यह धनराशि विद्यालय की छात्र संख्या के आधार पर निर्धारित की जाती है। हालांकि, इस बजट का उपयोग करना जितना महत्वपूर्ण है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण है इसके वित्तीय नियमों (Financial Rules) का पालन करना।
अक्सर जानकारी के अभाव में शिक्षक या प्रधानाध्यापक अनजाने में वित्तीय त्रुटियाँ कर बैठते हैं, जो बाद में ऑडिट के समय परेशानी का कारण बनती हैं। 'सर जी की पाठशाला' के इस विशेष लेख में, हम कंपोजिट ग्रांट व्यय से जुड़े 5 सबसे महत्वपूर्ण नियमों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
PPA (Print Payment Advice) का समयबद्ध प्रबंधन
अब सरकारी स्कूलों में नकद लेनदेन पूरी तरह बंद हो चुका है और सारा भुगतान PFMS (Public Financial Management System) पोर्टल के माध्यम से होता है।
- समय सीमा: जैसे ही सामग्री की खरीद या कार्य संपन्न हो, उसका PPA तुरंत जेनरेट करें। वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों (मार्च के अंत) में पोर्टल पर अत्यधिक ट्रैफिक होने के कारण सर्वर डाउन हो जाता है।
- पूर्ण व्यय: आवंटित धनराशि का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करना अनिवार्य है। यदि बजट का उपयोग नहीं होता है, तो वह 'लैप्स' होकर सरकारी कोष में वापस चला जाता है, जिससे विद्यालय विकास की दौड़ में पिछड़ सकता है।
कोटेशन की अनिवार्यता (वित्तीय पारदर्शिता)
सरकारी खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए '3 कोटेशन' का नियम सबसे बुनियादी है।
- प्रक्रिया: किसी भी दुकान या फर्म से सामान खरीदने से पहले, आपको कम से कम तीन अलग-अलग पंजीकृत विक्रेताओं से उनके लेटरहेड पर रेट लिस्ट (कोटेशन) प्राप्त करनी चाहिए।
- चयन (L1 Vendor): इन तीनों कोटेशन की तुलना करने के बाद, जिस विक्रेता की दरें सबसे कम (Lowest - L1) होंगी, उसे ही भुगतान किया जाना चाहिए। यह प्रमाणित करता है कि आपने सरकारी धन का मितव्ययिता से उपयोग किया है।
वैध GST नंबर और बिलिंग मानक
आज के डिजिटल युग में, बिना GST (Goods and Services Tax) नंबर वाले बिलों की कोई कानूनी मान्यता नहीं है।
- सक्रिय GSTIN: भुगतान करने से पहले सुनिश्चित करें कि फर्म का GST नंबर सक्रिय है।
- शपथ पत्र (Affidavit): कुछ विशेष कार्यों या उच्च मूल्य की खरीद के लिए फर्म से एक शपथ पत्र लेना चाहिए, जिसमें वह सामग्री की गुणवत्ता और सरकारी मानकों के पालन की गारंटी दे। बिना वैध बिल के किया गया भुगतान वित्तीय गबन की श्रेणी में आ सकता है।
आवश्यक दस्तावेजों का रख-रखाव (Record Keeping)
ऑडिट के समय केवल बिल ही काफी नहीं होते, बल्कि पूरी प्रक्रिया का प्रमाण चाहिए होता है। विद्यालय में निम्नलिखित रिकॉर्ड अपडेट रखें:
- SMC बैठक रजिस्टर: किसी भी खरीद से पहले विद्यालय प्रबंध समिति (SMC) की बैठक बुलाकर प्रस्ताव पारित करें और सदस्यों के हस्ताक्षर लें।
- स्टॉक रजिस्टर: खरीदी गई प्रत्येक वस्तु (जैसे- बाल्टी, पेंट, डेस्क, स्टेशनरी) की प्रविष्टि स्टॉक रजिस्टर में करें।
- उपभोग प्रमाण पत्र (Utilization Certificate): कार्य पूर्ण होने के बाद इसका प्रमाण पत्र तैयार रखें।
व्यय की प्राथमिकताएं (Priority of Expenditure)
शासन के निर्देशों के अनुसार, कंपोजिट ग्रांट का उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्यों के लिए किया जाना चाहिए:
- स्वच्छता और पेयजल: कुल ग्रांट का कम से कम 10% हिस्सा स्वच्छता, हाथ धोने के साबुन और शौचालय की सफाई पर खर्च होना अनिवार्य है।
- कायाकल्प और मरम्मत: बिजली फिटिंग, खिड़की-दरवाजों की मरम्मत, फर्श का टाइलीकरण और विद्यालय की पेंटिंग।
- शिक्षण सहायक सामग्री: बच्चों के लिए टीएलएम (TLM), चॉक, डस्टर और अन्य जरूरी स्टेशनरी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. क्या कंपोजिट ग्रांट पूरी एक साथ खर्च करना अनिवार्य है?
2. ₹5000 से कम की खरीद पर भी 3 कोटेशन ज़रूरी हैं?
3. क्या पुराने सत्र के बिलों का भुगतान अब कर सकते हैं?
4. PPA जेनरेट करने के कितने दिन तक बैंक में जमा कर सकते हैं?
5. क्या प्रधान या SMC अध्यक्ष के निजी खाते में पेमेंट कर सकते हैं?
6. स्वच्छता (Sanitation) के 10% बजट का उपयोग कहाँ करें?
निष्कर्ष
कंपोजिट स्कूल ग्रांट विद्यालय के कायाकल्प का आधार है। यदि प्रधानाध्यापक योजनाबद्ध तरीके से, कोटेशन प्रक्रिया का पालन करते हुए और समय पर PPA जेनरेट करके कार्य करते हैं, तो विद्यालय की व्यवस्था सुदृढ़ होगी और प्रशासनिक स्तर पर भी कोई बाधा नहीं आएगी।
शिक्षक साथियों, ध्यान रहे कि नियमबद्ध तरीके से किया गया खर्च ही सुरक्षित खर्च है।


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