उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रही है। हाल ही में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों ने प्रदेश में शिक्षा के गिरते स्तर और भर्तियों में हो रही देरी पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है।
| पद का नाम | रिक्त पदों की संख्या |
|---|---|
| TGT (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) | 24,515 |
| PGT (प्रवक्ता) | 6,216 |
| कुल रिक्तियां | 30,731 |
भर्ती की प्रक्रिया और कोटा प्रणाली
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि इन पदों को भरने के लिए एक निर्धारित कोटा सिस्टम लागू है:
- PGT पद: 50% सीधी भर्ती से और 50% पदोन्नति (Promotion) के माध्यम से भरे जाते हैं।
- TGT पद: सामान्य संस्थाओं में ये शत-प्रतिशत सीधी भर्ती से भरे जाते हैं। हालांकि, जिन संस्थाओं में संबद्ध प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, वहां 75% सीधी भर्ती और 25% पदोन्नति का नियम लागू होता है।
क्यों अटक रही है भर्ती?
भर्ती प्रक्रिया में देरी का सबसे बड़ा कारण उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन और उसकी कार्यप्रणाली रही है। निदेशालय के अनुसार:
- पुराना विज्ञापन: टीजीटी-पीजीटी भर्ती का पिछला विज्ञापन वर्ष 2022 में जारी किया गया था, जिसकी परीक्षा प्रक्रिया अभी भी आयोग के पास लंबित है।
- पोर्टल का विकास: आयोग के सचिव सुरेंद्र तिवारी के अनुसार, अब जिलों से रिक्त पदों का 'त्रुटिरहित' ब्योरा मांगा गया है।
- अधियाचन की प्रक्रिया: इसके लिए एक नया पोर्टल विकसित किया जा रहा है। पोर्टल तैयार होते ही जिलों को यूजर आईडी और पासवर्ड दिए जाएंगे, जिसके बाद पदों का सत्यापन कर अधियाचन (भर्ती की मांग) भेजा जाएगा।
छात्रों के भविष्य पर संकट
लंबे समय से नई नियुक्तियां न होने के कारण ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के एडेड स्कूलों में पठन-पाठन का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कई विद्यालयों में तो एक ही शिक्षक पर कई विषयों की जिम्मेदारी है, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता गिर रही है। प्रदेश के लाखों प्रतियोगी छात्र अब इस उम्मीद में हैं कि नया आयोग जल्द से जल्द परीक्षा तिथियों की घोषणा करेगा और नए पदों के लिए विज्ञापन जारी करेगा।


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