सुप्रीम कोर्ट में शिक्षक भर्तियों की निर्णायक सुनवाई: 69000, 72825 और 12460 भर्ती पर टिकी लाखों अभ्यर्थियों की नजर
नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India में उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित शिक्षक भर्तियों को लेकर महत्वपूर्ण सुनवाई की तारीखें तय कर दी गई हैं। 69,000, 72,825 और 12,460 शिक्षक भर्ती मामलों में होने वाली आगामी सुनवाई लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।
इन मामलों में कोर्ट का अंतिम फैसला न केवल चयनित शिक्षकों की सेवा स्थिति को स्पष्ट करेगा, बल्कि वर्षों से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों के लिए नई दिशा भी तय करेगा।
📅 सुनवाई का निर्धारित शेड्यूल
| भर्ती का नाम | सुनवाई की तिथि | समय |
|---|---|---|
| 72,825 शिक्षक भर्ती | 16 फरवरी 2026 | दोपहर 01:40 बजे |
| 69,000 शिक्षक भर्ती | 19 फरवरी 2026 | दोपहर 03:34 बजे |
| 12,460 शिक्षक भर्ती | 18 मार्च 2026 | कार्यसूची के अनुसार |
69,000 शिक्षक भर्ती: आरक्षण और मेरिट विवाद का अंतिम पड़ाव?
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामला पिछले कई वर्षों से आरक्षण व्यवस्था, कटऑफ और मेरिट सूची को लेकर विवादों में रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।
यदि कोर्ट कोई बड़ा आदेश देता है, तो इससे हजारों चयनित और प्रतीक्षारत अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
72,825 शिक्षक भर्ती: दशक पुराना विवाद अब अंतिम चरण में
72,825 शिक्षक भर्ती का मामला लगभग एक दशक पुराना है। इस भर्ती में चयन प्रक्रिया, अंक गणना और वैधानिक प्रक्रियाओं को लेकर कई याचिकाएं दायर हुई थीं।
16 फरवरी की सुनवाई में कानूनी पेचों पर महत्वपूर्ण बहस होने की संभावना है। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि इस बार मामला निर्णायक मोड़ पर पहुंचेगा।
12,460 शिक्षक भर्ती: शून्य जनपद विवाद पर क्या होगा फैसला?
12,460 शिक्षक भर्ती शून्य जनपद नीति और अन्य प्रशासनिक निर्णयों के कारण अटक गई थी। मार्च में प्रस्तावित सुनवाई में इस नीति की वैधता और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
यह फैसला भविष्य की भर्ती प्रक्रियाओं के लिए मिसाल बन सकता है।
अभ्यर्थियों के लिए जरूरी सलाह
- कोर्ट की तारीखों में बदलाव संभव है, इसलिए आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।
- सोशल मीडिया पर फैल रही अपुष्ट खबरों से बचें।
- किसी भी निर्णय से पहले अफवाहों के आधार पर कोई कदम न उठाएं।
शिक्षक भर्ती से जुड़े ये मामले केवल नियुक्ति का प्रश्न नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता से भी जुड़े हैं। आने वाली सुनवाई पूरे देश के शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अब सभी की निगाहें कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो भविष्य की शिक्षक भर्तियों की दिशा तय कर सकता है।


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