उत्तर प्रदेश: प्रदेश में जारी बोर्ड परीक्षाओं के बीच कक्ष निरीक्षण की जिम्मेदारी निभा रहे परिषदीय शिक्षकों के साथ दुर्व्यवहार का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। विद्यालय प्रबंधकों द्वारा कथित अभद्र व्यवहार और अनुचित टिप्पणियों से आक्रोशित उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने अब सीधे तौर पर ड्यूटी बहिष्कार की चेतावनी दे दी है।
शिक्षक संघ का आरोप है कि विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों, विशेष रूप से महिला शिक्षिकाओं के साथ माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधन द्वारा अपमानजनक व्यवहार किया जा रहा है। संघ के अनुसार, ड्यूटी के दौरान शिक्षकों को वह सम्मान नहीं मिल रहा है जिसके वे हकदार हैं, बल्कि उनके साथ 'बाहरी' जैसा व्यवहार कर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
"शिक्षक राष्ट्र का निर्माता है, और यदि परीक्षा केंद्रों पर उसकी गरिमा ही सुरक्षित नहीं है, तो वह निष्पक्ष होकर कार्य कैसे कर सकता है? हम अपमान सहकर ड्यूटी नहीं करेंगे।" — उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ
जांच और कार्रवाई की मांग
संघ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत कराया है कि कुछ विशिष्ट केंद्रों पर यह समस्या विकराल है। जिला स्तर पर सौंपे गए ज्ञापनों में निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी गई हैं:
- दोषियों पर कार्रवाई: अभद्र व्यवहार करने वाले प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों के खिलाफ तत्काल जांच शुरू हो।
- सुरक्षित वातावरण: परीक्षा केंद्रों पर कक्ष निरीक्षकों के लिए गरिमामय माहौल सुनिश्चित किया जाए।
- जवाबदेही: ड्यूटी के दौरान शिक्षकों के अधिकारों और सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित केंद्र व्यवस्थापक की हो।
बहिष्कार की चेतावनी से संकट में परीक्षाएं
शिक्षक संघ ने दो-टूक शब्दों में कहा है कि यदि प्रशासन ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया और दोषियों को दंडित नहीं किया गया, तो प्रदेश भर के परिषदीय शिक्षक बोर्ड परीक्षा ड्यूटी का पूर्ण बहिष्कार करेंगे। यदि ऐसा होता है, तो चल रही परीक्षाओं के सफल संचालन में गंभीर संकट पैदा हो सकता है, क्योंकि कक्ष निरीक्षण का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं शिक्षकों के कंधों पर है।


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