प्रयागराज: शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी के एक हालिया बयान ने उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षकों में भारी आक्रोश भर दिया है। संसद में दिए गए उनके उस बयान, जिसमें आरटीई (RTE) लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों के लिए भी टीईटी (TET) अनिवार्य करने की बात कही गई है, के विरोध में बुधवार को सुभाष चौराहे पर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ।
पुतला दहन को लेकर पुलिस से टकराव
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले जुटे सैकड़ों शिक्षकों ने सरकार के इस फैसले को "काला कानून" करार दिया। जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में जब शिक्षकों ने मंत्री का पुतला फूंकने की कोशिश की, तो पुलिस बल ने उन्हें बलपूर्वक रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों के बीच काफी देर तक धक्का-मुक्की और नोकझोंक हुई। अंततः पुलिस शिक्षकों के हाथ से पुतला छीनने में सफल रही।
सड़क पर उतरे शिक्षक, लगा लंबा जाम
पुतला छिन जाने से नाराज शिक्षकों ने संसद में दिए गए उत्तर की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया। बड़ी संख्या में महिला शिक्षकों की मौजूदगी को देखते हुए भारी पुलिस बल और महिला पुलिसकर्मी तैनात रहे। प्रदर्शनकारी शिक्षक जब सुभाष चौराहे के बीचों-बीच पहुँच गए, तो चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।
शिक्षकों की मुख्य मांगें और चेतावनी
शिक्षक नेताओं का तर्क है कि जो शिक्षक आरटीई कानून आने से पहले से सेवा में हैं, उन पर नई पात्रता शर्तें थोपना उनके करियर के साथ खिलवाड़ है।
- देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव (जिलाध्यक्ष): "सरकार की गलत नीतियों से बेसिक शिक्षा ढांचा चरमरा रहा है। पुराने शिक्षकों को इस अनिवार्यता से तत्काल छूट मिलनी चाहिए।"
- शिव बहादुर सिंह (जिलामंत्री): "यह तो बस शुरुआत है। अगर टीईटी से मुक्ति नहीं मिली, तो संगठन प्रदेश व्यापी 'आर-पार' की लड़ाई लड़ेगा।"


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