नई दिल्ली: बीमा नियामक इरडा (IRDAI) जल्द ही बीमा एजेंटों को दिए जाने वाले भारी-भरकम कमीशन पर लगाम लगाने जा रहा है। अब एजेंटों को पॉलिसी बेचते ही पूरा कमीशन एक साथ (Upfront) देने के बजाय 'स्थगित कमीशन मॉडल' (Deferred Commission Model) अपनाने पर विचार किया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ है कि एजेंट को कमीशन का भुगतान पॉलिसी की पूरी अवधि के दौरान टुकड़ों में किया जाएगा।
क्या है 'डिफर्ड कमीशन' और यह कैसे काम करेगा?
वर्तमान व्यवस्था में एजेंटों को पहले साल ही मोटा कमीशन मिल जाता है, जिससे कई बार 'गलत बिक्री' (Misselling) को बढ़ावा मिलता है। नए प्रस्ताव के तहत:
- कॉरपोरेट एजेंट्स: इनके लिए कमीशन का भुगतान 5 साल की अवधि में फैलाया जा सकता है।
- व्यक्तिगत एजेंट्स: इनके लिए 3 साल का प्रस्ताव दिया गया है।
- उद्देश्य: पॉलिसी जितने लंबे समय तक चलेगी, एजेंट को उतना ही कमीशन मिलता रहेगा। इससे एजेंट ग्राहक को बेहतर सेवा देने और पॉलिसी को चालू रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे।
क्यों पड़ी सख्त नियमों की जरूरत?
वित्त वर्ष 2025 के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। जीवन बीमा कंपनियों का कमीशन भुगतान 60,800 करोड़ रुपये और साधारण बीमा कंपनियों का 47,000 करोड़ रुपये के पार पहुँच गया है।
- बढ़ता खर्च: पिछले एक दशक में पॉलिसियों की संख्या स्थिर रहने के बावजूद कंपनियों के खर्च में 9.4% सालाना की वृद्धि हुई है।
- प्रबंधन सीमा का उल्लंघन: कई कंपनियां अपने 'मैनेजमेंट खर्च' की तय सीमा को पार कर चुकी हैं, जिस पर आरबीआई और आर्थिक सर्वेक्षण में भी चिंता जताई गई थी।
ग्राहकों और कंपनियों पर क्या होगा असर?
"कमीशन को पॉलिसी की उम्र से जोड़ने का मकसद बीमा को सस्ता, टिकाऊ और पारदर्शी बनाना है।"
- सस्ता बीमा: वितरण खर्च घटने से कंपनियों के पास प्रीमियम कम करने या ग्राहकों को बेहतर रिटर्न देने की गुंजाइश बढ़ेगी।
- गलत बिक्री पर रोक: ऊंचे कमीशन के लालच में एजेंट अब ग्राहकों को लुभावने और झूठे वादों के आधार पर पॉलिसी नहीं बेच पाएंगे।
- एजेंट की जिम्मेदारी: एजेंटों की आय अब पॉलिसी चालू रहने पर निर्भर करेगी, जिससे वे ग्राहक की सेवा में अधिक रुचि लेंगे।
संभावित चुनौतियाँ: घट सकता है बिजनेस?
हालांकि, इस सख्ती के अपने जोखिम भी हैं। बीमा सेक्टर का तर्क है कि भारत जैसे बाजार में वितरण नेटवर्क खड़ा करने के लिए उच्च कमीशन जरूरी है। जानकारों का मानना है कि कमीशन पर अचानक लगाम लगाने से एजेंसी नेटवर्क और बैंक-एश्योरेंस पार्टनरशिप को झटका लग सकता है, जिससे नए बिजनेस की मात्रा में गिरावट आने की आशंका है।
अगले कदम: इरडा अगले कुछ महीनों में इन नए नियमों को आधिकारिक रूप से लागू कर सकता है, जो पूरे बीमा उद्योग की कार्यप्रणाली को बदल कर रख देंगे।


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