उत्तरप्रदेश जूनियर एडेड भर्ती 2021 कोर्ट ऑर्डर ✍️
प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था को दोहराते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई जूनियर हाई स्कूल (कक्षा 6 से 8) अपग्रेड होकर हाई स्कूल या इंटरमीडिएट कॉलेज बन जाता है, तो वहां शिक्षकों की भर्ती के नियम बदल जाएंगे। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में नियुक्तियां 'यूपी बेसिक शिक्षा अधिनियम' के बजाय 'उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921' के प्रावधानों के तहत ही की जानी चाहिए।
मामले की पृष्ठभूमि
यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने राम कुमार भारद्वाज द्वारा दायर रिट याचिका (WRIT - A No. 1966 of 2026) पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले के केंद्र में अलीगढ़ का 'प्रेम विद्यालय' था, जो पहले जूनियर हाई स्कूल था लेकिन बाद में इंटरमीडिएट स्तर तक अपग्रेड हो गया। विवाद तब शुरू हुआ जब संस्थान के लिए 'असिस्टेंट टीचर' के पद पर नियुक्ति हेतु विज्ञापन निकाला गया, लेकिन इसमें पुराने नियमों (बेसिक शिक्षा अधिनियम) का सहारा लिया गया।
कोर्ट का मुख्य तर्क और 'मंजू अवस्थी' केस का हवाला
सुनवाई के दौरान अदालत ने श्रीमती मंजू अवस्थी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2013) के प्रसिद्ध फैसले पर भरोसा जताया। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा:
- एक बार जब कोई संस्थान जूनियर हाई स्कूल से अपग्रेड होकर हाई स्कूल या इंटर बन जाता है, तो वह U.P. Intermediate Education Act, 1921 के दायरे में आ जाता है।
- ऐसे संस्थानों में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा दी गई नियुक्तियां या विज्ञापन अवैध माने जाएंगे।
न्यायालय का आदेश
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में निम्नलिखित महत्वपूर्ण बिंदु रखे:
- पुराना विज्ञापन रद्द: अदालत ने बेसिक स्कूलों के नियमों के तहत जारी किए गए विज्ञापनों को उन कॉलेजों के लिए रद्द कर दिया है जो हाई स्कूल या इंटरमीडिएट में अपग्रेड हो चुके हैं।
- नया विज्ञापन जारी करने की छूट: कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को छूट दी है कि वे अब 'यूपी इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921' के नियमों के अनुसार नए सिरे से विज्ञापन जारी कर भर्ती प्रक्रिया शुरू करें।
- अन्य स्कूलों पर प्रभाव: जो स्कूल अभी भी केवल जूनियर हाई स्कूल के रूप में कार्यरत हैं (अपग्रेड नहीं हुए हैं), वहां भर्ती प्रक्रिया कानून के अनुसार जारी रह सकती है।
निष्कर्ष
इस फैसले से यह साफ हो गया है कि शिक्षण संस्थानों के स्तर में बदलाव के साथ ही उनके प्रशासनिक और नियुक्ति नियम भी बदल जाते हैं। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कानून की अनदेखी कर पुराने नियमों से की गई नियुक्तियां मान्य नहीं होंगी।





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